तेजी से नीचे भागते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से जल संचयन की योजना बनाई गई। इसके लिए जनपदों में स्थित पोखरे और पोखरियों की मरम्मत और साफ-सफाई का अभियान शुरू किया गया। सरकार की इस योजना पर अब तक जिले में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं निकला। हरैया ब्लाक में 51 पोखरियां खोदी गई थी, लेकिन अधिकांश मार्च माह के अंत तक सूख गई थी।
जनपद के हरैया ब्लाक में वर्ष 2015-16 में 46 लाख 26 हजार 948 रुपये से 51 पोखरों की खुदाई की गई। इतना धन खत्म होने के बाद भी परिणाम कुछ नहीं निकला। क्षेत्र के ज्यादातर पोखरों में अप्रैल माह में पानी नहीं है। वहीं बहुत से पोखरे और पोखरियों पर अवैध कब्जा हो गया है। खंड विकास कार्यालय हरैया में उपलब्ध अभिलेखों पर गौर करें तो ब्लाक क्षेत्र के 51 पोखरों की खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है।
यही नहीं, कई पोखरे ऐसे भी है, कागजों में जिनकी कई बार खुदाई कर पैसे का भुगतान करा लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना होता है कि बारिश नहीं हुई तो तालाबों में पानी कहां से आएगा। क्षेत्र के कई गांवों में पोखरियों पर कब्जा होने से लोगों को अपने घरों का गंदा पानी बाहर निकालने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि उच्च न्यायालय द्वारा तालाबों, पोखरों से अतिक्रमण को हटाने का निर्देश मिला है।
हरैया ब्लाक के मसुरियापुर, बैजाबारी, सेठाकोली, बछुआखास, पुराबाल नरायन, मऊकुतुबपुर, हसनपुर, चांदपार, ब्रहमौली, बनकटा, बनहरा, बेलकुंडा, पुराबालनरायन, पहाड़पुर, खोजौली, हरैया, गड़ौरा मझौरा आदि गांवों में अभिलेखों में पोखरों की सफाई होना दर्शाया गया है लेकिन वास्तविक हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
बैदौली गांव निवासी पूरनचंद गुप्ता ने कहा कि उनके गांव स्थित पोखरे की खुदाई कभी कराई ही नहीं गई और भुगतान करा लिया गया। जल संचयन के नाम पर खेल होता है।
सेटाकोली गांव निवासी श्रीकांत पटेल ने बताया कि गांव के रामनयन के खेत के पास स्थित पोखरे के अतिक्रमण को अभी तक हटाया नहीं जा सके और न ही सफाई ही कराई गई। पोखरा सूख रहा है।
सेठाकोली गांव के पूर्व बीडीसी प्रेमचंद गुप्ता ने बताया कि गांव की सड़क के बगल वाली पोखरी की खुदाई उन्होंने कराई लेकिन उसकी भी हालत ठीक नहीं है।
बरडीहा गांव निवासी जयनाथ पटेल ने बताया कि उनके गांव में पोखरी की खुदाई हुई लेकिन आधी अधूरी। हालांकि अभी तो पोखरी में पानी है लेकिन आगे चलकर परेशानी होगी।