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कार्यालय से कोई आदेश ही जारी होने से ही मुकरा विभाग

Tue, 28 Nov 2017 11:23 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
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अागरा ‌व‌िवि - फोटो : अमर उजाला
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आमजगढ़। डॉ. भीमवराव अंबेडकर विवि आगरा से वर्ष 2004-05 के दौरान हासिल की गई फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर मंडल में नौकरी करने के मामले में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी सूची से बिना मिलान के आगरा विवि के सही बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को फर्जी बताने वाला विभाग अब कोई जांच रिपोर्ट जारी करने से ही मुकरने लगा है।
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मंगलवार शाम को तो रिपोर्ट तैयार करने वाले बाबू ने यहां तक कह डाला कि सचिव को सिर्फ आगरा विवि की डिग्री पर नौकरी करने वाले की सूची भेजी गई है। कुल मिलाकर गलत जांच रिपोर्ट जारी करने वाला विभाग अब अपनी गर्दन बचाने में जुट गया है।

आगरा विवि से वर्ष 2005 में बीएड की फर्जी डिग्रियां जारी करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद हाईकोर्ट ने इसकी एसआईटी से जांच कराई थी। इसमें जांच टीम को 3517 डिग्री फर्जी और 1053 डिग्रियां टेंपर्ड मिली थीं।
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पिछले दिनों सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इन फर्जी 4570 डिग्रियों की सूची एडी बेसिक को जारी कर संबंधित जिलों में जांच करने और इस पर शिक्षक  बने लोगों को सूची से चिह्नित कर सेवा समाप्त करने और विधिक कार्रवाई के आदेश दिए थे।

एडी बेसिक की ओर से 10 नवंबर को सचिक बेसिक शिक्षा को भेजी गई रिपोर्ट में बिना जांच के ही आजमगढ़ के 12, बलिया के 15 और मऊ के दो शिक्षकों समेत 29 की बीएड डिग्री को फर्जी बताया।

साथी ही सभी बीएसएस को इसे जारी कर संबंधित शिक्षकों पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए। पांच नवंबर को फिर से सभी बीएसएस को पत्र भेजकर पूर्व में भेजे गए आदेश के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

साथ ही सचिव की ओर से भेजी गई सीडी को भी भेजकर आगरा विवि से वर्ष 2005 में बीएड की फर्जी डिग्री पर जिले में नौकरी पाकर अन्यत्र समायोजित होने वाले शिक्षकों को चिह्नित करने के आदेश दिए थे।

इस बीच वर्ष 2016 के दौरान हुई 15000 और 16448 शिक्षक भर्ती की जांच कर रहे अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह ने सचिव  की सूची से 29 शिक्षकों का मिलान किया तो मंडल के मात्र चार शिक्षक ही 3517 की फर्जी डिग्रियों की सूची में शामिल पाया गया।

जांच रिपोर्ट गलत निकलने की बात फैलते ही एडी बेसिक कार्यालय सकते में आ गया है। पहले तो अपनी ही रिपोर्ट को सही बताया जाता रहा। वहीं, सभी बीएसए कार्यालय को जांच रिपोर्ट में शामिल शिक्षकों पर कोई कार्रवाई करने से रोक भी दिया गया। अंदर खाने संशोधित सूची जारी करने की बात कही जाने लगी।

अब पेंच ये है कि एडी बेसिक अपनी जांच रिपोर्ट को गलत माने तो कैसे। रिपोर्ट को तैयार करने वाले कार्यालय का संविदा बाबू तो एक कदम और आगे निकला। पूछने में ये तक कह डाला कि विभाग की ओर से कोई आदेश जारी किया ही नहीं गया है।

एडी बेसिक से इस संबंध में बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन स्विच आफ मिला। कुल मिलाकर गलत जांच रिपोर्ट जारी करने वाला विभाग अब अपनी गर्दन बचाने में जुट गया है। फिलहाल उसे कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है।

कमिश्नर और एडीएम को सौंपा ज्ञापन, धन उगाही का आरोप लगाया
आजमगढ़। आगरा विवि से 2005 में जारी बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर मंडल के 29 शिक्षकों को फर्जी बता सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को रिपोर्ट भेजने के बाद सूची में शामिल शिक्षक मंगलवार को भी विभिन्न दफ्तरों की खाक छानते रहे।

एडीएम के पास पहुंचे शिक्षकों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर बताया कि उन्होंने 2004-05 में आगरा विवि से बीएड किया था। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी 3517 फर्जी और 1053 टेंपर्ड डिग्री की सूची में उनका कहीं नाम नहीं है।

इसके बाद भी उन्हें फर्जी बता एडी बेसिक ने अपनी जांच रिपोर्ट में शामिल कर दिया है। मामले की जानकारी होने पर एडी बेसिक कार्यालय से संपर्क किया गया, लेकिन हमें गुमराह किया जा रहा है।

आरोप लगाया कि सही शिक्षकों को फंसा कर धन उगाही और मानसिक उत्पीड़न के लिए मनमाने ढंग से उन्हें फंसाया जा रहा है। यही शिकायत शिक्षकों ने कमिश्नर को भी की। हालांकि कमिश्नर भी शिक्षकों को जांच का भरोसा देने के बजाय एडी बेसिक की रिपोर्ट को ही सही बताते रहे। शिकायत करने वालों में फतेहबहादुर यादव, समर बहादुर, अमित कुमार मिश्र, हरिकेश, गोविंद कुमार आदि शामिल थे।
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