आजमगढ़। शहर में दूसरी एसटीपी के लिए जमीन नहीं मिल पाने के कारण गंदे पानी से तमसा नदी दूषित हो रही है। जिले के पठखौली में बनी एसटीपी की क्षमता मात्र आठ एमएलडी सीवेज शोधन की है। इससे अन्य क्षेत्रों के नालों के गंदे पानी का ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है।
दूसरी एसटीपी की स्थापना के लिए सिधारी क्षेत्र में अभी जल निगम को जमीन ही नहीं मिल पाई है। पहली एसटीपी से आधा शहर ही जुड़ पाया है। शहर से निकलने वाले कई बड़े नालों का पानी तमसा नदी में गिरता है। इससे तमसा नदी का जल प्रदूषित होता है। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीटमेंट कर तमसा नदी में छोड़ने के लिए वर्ष 2022 में 42 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मंजूरी मिली। तीन साल में कार्यदायी संस्था जल निगम ने सीवर लाइन बिछाने व पठखौली में एसटीपी का काम पूरा कर लिया। अब सीवर लाइन से 6600 घरों के नालों को जोड़ने का काम चल रहा है। विभाग की माने तो अधिकांश घरों के नालों को सीवर लाइन से जोड़ने का काम हो चुका है। आठ एमएलडी क्षमता वाली एसटीपी से प्रतिदिन लगभग दो एमएलडी सीवेज भी शोधित हो रहा है। वहीं, देखा जाय तो एसटीपी से शहरी क्षेत्र का आधा भाग ही जुड़ पाया है। शहर का एक बड़ा हिस्सा सिविल लाइन, रैदोपुर, मड़या, सिधारी, नरौली, हरबंशपुर, सर्फ़ुद्दीनपुर आदि नहीं जुड़ पाएं हैं। ऐसे में इन मुहल्लों से नालों के माध्यम से निकलने वाला गंदा पानी तमसा नदी में ही गिरता रहेगा। हालांकि जल निगम की ओर से दूसरी एसटीपी के निर्माण के लिए एक साल से अधिक समय से जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक विभाग को जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। इसके कारण उसका डीपीआर भी नहीं बन पा रहा है।
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पहले एसटीपी का निर्माण पूरा हो चुका है। प्रतिदिन लगभग दो से तीन एमएलडी सीवेज शोधित हो रहा है। दूसरी एसटीपी के लिए जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी जमीन मिल नहीं पाई है। जमीन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
-भूपेंद्र कुमार, एई, जल निगम नगरीय