आजमगढ़। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) का गठन हुए 17 साल बीत गए, लेकिन अभी तक किसी भी बिल्डर ने अभी एडीए में पंजीकरण नहीं कराया है।
इसके बाद भी जिले में वर्तमान में 50 से अधिक जगहों पर अवैध प्लाटिंग कर जमीन की बिक्री का कार्य जारी है। जनवरी 2024 में एडीए क्षेत्र का विस्तार होने के बाद इसमें जैसे बाढ़ सी आ गई है। वहीं एडीए अधिकारी और कर्मचारी नोटिस जारी करने तक सिमटे हैं।
जनपद में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन 2008 में हुआ। प्राधिकरण की पुरानी महायोजना 2011 में ही पूरी हो गई। लेकिन, नई महायोजना 2031 को लागू होने में काफी समय लग गया और यह 2024 में लागू हुई। इसके साथ ही एडीए का क्षेत्र भी बढ़ गया।
एडीए के गठन के बाद से ही जिले में अवैध कालोनियों का विकास शुरू हो गया। तथाकथित बिल्डरों ने जगह-जगह किसानों से जमीन एग्रीमेंट के आधार पर लेकर उसकी प्लॉटिंग कराकर बिक्री करना शुरू कर दिया। इस दौरान बिल्डरों ने कई अवैध कॉलोनियां विकसित कर दीं। इन बिल्डरों ने वन क्रीड़ा पार्क की भूमि को भी नहीं बख्शा।
सबसे बड़ी बात तो यह रही कि इनमें से कोई भी बिल्डर एडीए में पंजीकृत नहीं था। इसके बाद भी एडीए इस कारोबार को फलते फूलते देखता रहा। वर्तमान में एडीए के विस्तारीकरण के बाद एक बार फिर से जिले में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। एडीए के कर्मचारी शहर क्षेत्र में लोगों को नोटिस जारी कर रहे हैं वहीं अवैध प्लॉटर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से जमीन का एग्रीमेंट कराने के बाद उसकी प्लॉटिंग कराकर बिक्री कर रहे हैं।
यह मामला अभी तक हमारे संज्ञान में नहीं था। आपके द्वारा इस मामले को संज्ञान में लाया गया है तो हम अवैध रूप से हुई प्लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। -राहुल विश्वकर्मा, प्रभारी एडीए सचिव।