आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे निजामुद्दीन के संस्मरण पर जिला प्रशासन किताब प्रकाशित कराने की कवायद में जुट गया है। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने इस कार्य की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षाधिकारी राकेश को सौंपी है। बीएसए ने कार्य को यथाशीघ्र पूरा करने के लिए दो शिक्षकों को लगाया है, जो निजामुद्दीन के संस्मरण को हिंदी और उर्दू में लिपिबद्घ करेंगे।
बताते चले कि निजामुद्दीन मूलरूप से बिलरियागंज के निवासी है। वर्तमान समय में वे मुबारकपुर थाना क्षेत्र के ढकवा गांव में रह रहे हैं। निजामुद्दीन के पिता इमाम अली जीविकोपर्जन के लिए सिंगापुर रहते थे। वहां वे कैंटिन चलाते थे। वर्ष 1940 में निजामुद्दीन घर से भागकर अपने पिता के पास सिंगापुर चले गए। यहां उनकी मुलाकात आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेता जी सुभाषचंद्र बोस से हुई। नेताजी से प्रभावित होकर निजामुद्दीन आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए।
वहां से वे वर्ष 1969 में वापस घर लौटे। बाद में पारिवारिक दायित्व का दबाव बढ़ा। इसी पर निजामुद्दीन जैसे तैसे परिवारिक दायित्वों की पूर्ति करने लगें। वर्ष 2002 में अमर उजाला ने निजामुद्दीन को तलाशा। इसके बाद से निजामुद्दीन को सम्मानित करने का दौर शुरू हुआ, लेकिन किसी ने उनके परिवार की दयनीय दशा की तरफ ध्यान नहीं दिया।
इतना ही नहीं, निजामुद्दीन की चाहत थी कि उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का खिताब मिले लेकिन साक्ष्य सबूत के अभाव में उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही लेकिन जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने निजामुद्दीन को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा दिलाने की कवायद तो शुरू ही की। साथ ही साथ उनके संस्मरण से पुस्तक भी प्रकाशित करने की योजना बनाई है।
बेसिक शिक्षाधिकारी राकेश ने बताया कि पुस्तक लिखने के लिए उर्दू शिक्षक एतराम हैदर और जफरूल हुसैन को लगाया गया है। जल्द की उनके संस्मरण को संकलित कर लिया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि पुस्तक में उन तथ्यों को शामिल किया जाएगा जो समाज के लिए प्रेरणादायक होगा। इसमें आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज के सिपाहियों ने किस परिस्थिति में रहकर कैसे लड़ाई की। निजामुद्दीन के साथ हुई घटना, नेता जी के बारे में ज्यादा से ज्यादा तथ्य संकलित किया जाएगा।