एनएच-233 लुंबिनी-सारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए मनमाने तरीके से अधिगृहीत की गई जमीन के उचित मुआवजे के लिए किसान बचाओ आंदोलन के बैनर तले किसानों ने सोमवार को सेमरहा गांव में धरना दिया। बाद में एसडीएम सदर एके सिंह से जाकर प्रतिनिधिमंडल मिला। उन्होंने इसके लिए तीन दिन की मोहलत मांगी। आश्वासन मिलने पर तीन दिन के लिए आंदोलन को स्थगित कर दिया।
सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किसान बचाओ आंदोलन के बैनर तले क्षेत्र के किसानों ने पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सेमरहा गांव में धरना शुरू किया। पांच सूत्रीय मांगों में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-2013 के तहत अधिग्रहीत जमीनों का मुआवजा देने, एक ही गांव में नियम विरुद्घ अलग-अलग रेट का मुआवजा दिए जाने, जमीनों के अधिग्रहण से पूर्व अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ बैठक न करने और किसानों की सहमति न लेने के बाबत स्थिति स्पष्ट करना आदि मांगे शामिल हैं।
किसान बचाओ आंदोलन के संयोजक गोपाल जी यादव ने कहा कि जिला प्रशासन उनके आंदोलन को कत्तई नहीं कुचल सकता। हम प्रशासन से भीख नहीं मांग रहे बल्कि अपनी जमीन का वाजिब मुआवजा चाहते हैं। हाइवे में जमीन चले जाने से किसान पहले से सदमे में हैं अब अगर उसे वाजिब मुआवजा नहीं मिला और उसके साथ कुछ अनहोनी होती है तो इसे कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन के महासचिव कालिका राय ने कहा कि प्रशासन के कुछ लोग किसानों को धमकियां देकर आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उनमें से एक तबका ऐसा भी है जो किसानों के बीच फूट डालकर आंदोलन को कमजोर करना चाहता है। किसान उनकी नियत को भली भांति समझते हैं और उनके झांसे में आने वाले नहीं हैं। धरने के बाद एसडीएम सदर के बुलावे पर गोपाल जी यादव के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल उनसे मिला और अपनी बातें रखी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगें तीन दिन के अंदर पूरी कर दी जाएंगी। उनके आश्वासन के बाद संयोजक ने आंदोलन तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया। इस मौके पर रमाशंकर राय, रामअवतार, सत्यम राय, अमृत लाल यादव, लालजी यादव, कृष्णा यादव, मुकेश कुमार आदि उपस्थित थे।