आजमगढ़। हनुमानगढ़ी स्थित गुरुद्वारे की भूमि पर कुछ लोगों ने अभिलेखों में हेराफेरी कर अपना नाम दर्ज करा लिया गया था। उनके द्वारा उक्त जमीन की बिक्री भी की जा रही थी। गुरुवारा कमेटी के लोगों ने इस मामले को डीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई केे बाद डीएम ने उक्त भूमि से हेराफेरी कर नाम दर्ज कराने वालों के नाम निरस्त कर उसे गुरुद्वारे के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
गुरुद्वारा कमेटी के अधिवक्ता माया शंकर सिंह ने बताया कि विवादित भूमि 1872 जिल्द बंदोबस्त के खसरा और जिल्द बंदोबस्त 1307 फसली से स्पष्ट है कि उक्त भूमि गुरुद्वारा और उससे संबंधित भूमि है। लेकिन 1349 फसली में कूट रचना करके उक्त भूमि पर कुछ लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया। जबकि इसे मामले की जांच तहसीलदार सदर द्वारा की गई। जिसमें उन्होंने उक्त भूमि से आबादी को खारिज करते हुए गुरुनानक दरबार संगत गुरूद्वारा विठ्ठलघाट के नाम से अंस्त करने का अनुरोध किया। डीएम न्यायालय में अधिवक्ता मायाशंकर सिंह और विद्वान जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ओमप्रकाश राजभर ने साक्ष्यों और जोरदार तर्कों को प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों के दलीलों और तर्कों को सुनने के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने उक्त भूमि पर दर्ज खातेदारों के नाम को निरस्त करते हुए उसे 1307 फसली के अनुसार बाबा रामदास गोसाई चेला बाबा हरदयाल दास कौम फकीर नानक पंथी गुरूद्वारा गुरुनानक दरबार अंकित करने का आदेश दिया। एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर और प्रभारी अधिकारी राजस्व अभिलेखागार को एक सप्ताह में आदेश का अनुपालन कर आख्या एक सप्ताह में न्यायालय में प्रेषित करने का निर्देश दिया।