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आज तमसा-मंजुषा संगम में लगाएंगे डुबकी

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दुर्वासा धाम पर लगे मेले में पहुंचने लगे श्रद्धालु। - फोटो : AZAMGARH
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मेजवां/अहरौला/लाटघाट/रानी की सराय/मेहनगर। जिले के फूलपुर क्षेत्र के पौराणिक स्थल दुर्वासा धाम सहित रानी की सराय में अवंतिकापुरी, मेहनगर में महामंडलेश्वर सहित अन्य स्थानों पर सोमवार को श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी रहा। इस दौरान रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। दुर्वासा पर हजारों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस सहित स्थानीय प्रशासन चुस्त दिखी।
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ऋषि दुर्वासा, दत्तात्रेय, चंद्रमा मुनि तीनों ऋषि अत्रि व अनसुईया के पुत्र ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अंशावतार के रूप में अवतरित हुए। माता अनुसुइया द्वारा त्रिदेवों के अंशावतार अपने पुत्रों को तपस्या के लिए काशी व अयोध्या के बीच में पड़ने वाले तमसा- मंजूषा के संगम स्थल को सर्वोपरि तपोस्थली बताया। जो आज दुर्वासा के नाम से विख्यात है। माता अनुसुइया के आदेश से अपने अट्ठासी हजार ऋषियों के साथ ऋषि दुर्वासा ने दुर्वासा धाम के दुर्गम वन क्षेत्र को अपनी तपोस्थली बनाई, यहां से थोड़ी दूर तमसा के ही तट पर निजामाबाद में ऋषि दत्तात्रेय ने तपोस्थली बनाई। इसी प्रकार चंद्रमा ऋषि ने अवंतिकापुरी को अपनी तपोस्थली बनाई। तीनों जगहों पर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान व मेला लगता है। दुर्वासा धाम में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तमसा- मंजूषा के संगम में श्रद्धालु गोता लगाते हैं। मनोकामनाएं पूर्ति के लिए मनौती मानते हैं। संगम में हजारों श्रद्धालु स्नान करते है और स्नान के बाद पांच किलोमीटर के क्षेत्र में पंचकोशी परिक्रमा भी करते हैं। दुर्वासा मंदिर के पुजारी श्रीराम गिरी बताते है कि मान्यता के अनुसार यहां संगम में स्नान के बाद पंचकोशी परिक्रमा करने के बाद ही स्नान का पुण्य मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि दुर्वासा ऋषि के शिष्य यहां से पांच किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए थे और सबके पास कुछ न कुछ कार्य करने होते थे जैसे बगल के गांव दुबैठा में दुर्वासा ऋषि की गाय चरने जाया करती थी तो फुलवरिया, फूलपुर से पूजा के लिए फूल आते थे, इसी प्रकार गजड़ी गांव में लाए गए फूलों से पूजा के लिए गजङा (विशेष माला) तैयार होता था धर्मदासपुर, खुरासों, कल्होरा, शंभूपुर, गौरी का पूरा आदि गांव दुर्वासा ऋषि से जुड़े हुए थे, ये पंचकोशी परिक्रमा के केंद्र में आते हैं। सोमवार को बटोर के दिन दुर्वासा धाम पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। जिसके मद्देनजर रोडवेज और खुरासन रोड रेलवे स्टेशन पर काफी भीड़ रही।
इसी क्रम में रानी की सराय के अंवतिकापुरी धाम में कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले ही दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगा दी हैं। श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा पर सरोवर में स्नान कर राम जानकी मंदिर में पूजन अर्जन कर दान करेंगे। वहीं भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई थानों की फोर्स भी तैनात की जाएगी। उधर रौनापार थाना क्षेत्र के नैनीजोर गांव में शिव मंदिर पर भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला लगेगा। बता दें कि यह मेला सरयू नदी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व के नाम से जाना जाता था। आज वर्तमान में सरयू नदी मेला स्थल से काफी दूर करीब नौ किलोमीटर उत्तर से होकर बह रही है। यह देवारा क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है। मेेले में लोगों की उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस पूरी तरह से सतर्क है। इसी प्रकार मेहनगर कस्बे के गौरा गांव स्थित पातालपुरी महामंडलेश्वर धाम में बने सरोवर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करेंगे।
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बटोर पर उमड़े भक्त, कई की कटी जेब
मेजवां। खुरासन रोड रेलवे स्टेशन से लगभग छह किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में पौराणिक स्थल दुर्वासा धाम में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेला के पहले दिन बटोर पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने पवित्र नदी तमसा-मंजूषा के संगम में स्नान कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। प्रशासन द्वारा मेला में यातायात, सुरक्षा, चिकित्साए सफाई आदि की समुचित व्यवस्था का का दावा किया जा रहा है। लेकिन सोमवार को मेले में आए लोगों को काफी दुश्वारिया झेलनी पड़ी। इस वर्ष पवित्र नदी में पानी पर्याप्त रहने पर लोगों में हर्ष है। स्नान ध्यान के बाद लोगों ने सर्कस और मौत का कुआं, आसमानी झूला, एक्सप्रेस ट्रेन आदि भरपूर आनंद लिया। मेला में कई थानों की पुलिस की तैनाती की गई थी। जिसकी मॉनिटरिंग सीओ रविशंकर प्रसाद और कोतवाल स्वयं कर रहे हैं। बावजूद इसके जेबकतरों ने कईयों की जेब साफ कर दी। संवाद
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