आजमगढ़। मुंबई से आ रहे जो प्रवासी कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं उनमें संक्रमण की स्थिति काफी गंभीर है। इसे लेकर जिला प्रशासन भी चिंतित है। स्थिति को देखते हुए हर तहसील में तीन तरह के शेल्टर होम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें एक आम शेल्टर होम होगा जिसमें दो दिन के लिए लोग क्वारंटीन हो रहे हैं। दूसरा इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन बनाया जाएगा। इसमें लक्षण वाले संदिग्धों को रखा जाएगा। तीसरे में ऐसे लोगों को रखा जाएगा जिनके घर में अलग कमरा और शौचालय नहीं है। वहीं मुंबई से आने वाले प्रवासियों पर एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ और एमओआईसी क्षेत्र बांटकर स्वयं नजर रखेंगे। तीन दिन पर नहीं इनकी प्रतिदिन निगरानी कर रिपोर्ट ली जाएगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि मुंबई का संक्रमण गंभीर किस्म का है। इसको लेकर जिला प्रशासन भी चिंतित नजर आ रही है। डीएम एनपी सिंह ने बताया कि इसको लेकर सतर्कता बरतनी अति आवश्यक है। इसलिए मुंबई के प्रवासियों की प्रतिदिन निगरानी की जाएगी और लक्षण आदि की जांच की जाएगी। लक्षण वाले मरीजों को अलग शेल्टर होम में रखा जाएगा। जिनके घर में अलग कमरे और शौचालय की व्यवस्था नहीं है उन्हें अलग शेल्टर होम में रखा जाएगा। साधारण शेल्टर होम में रेलवे और रोजवेज से आने वाले प्रवासियों को रखा जाएगा।
अभी तक पहुंचे 39 हजार प्रवासी
आजमगढ़। आजमगढ़ में सुबह शुक्रवार सात बजे तक कुल 39 हजार प्रवासी पहुंच चुके थे। इसमें रेलवे और रोजवेज से 22,791 और 16,034 लोग अपने साधनों से पहुंचे हैं। ये आंकड़े एक मई से शुक्रवार सुबह सात बजे तक के हैं। शुक्रवार को गुजरात के ही विभिन्न शहरों से तीन ट्रेनों की आने की संभावना जताई जा रही थी। इसके अलावा बाहर से लोगों का अपने साधनों से भी आने का क्रम जारी है।
17 से 28 तक नहीं आएंगी ट्रेनें
डीएम एनपी सिंह ने बताया कि 17 से 28 मई तक कोई ट्रेन नहीं आएगी। रेलवे की ओर से ट्रैकों की मरम्मत आदि का कार्य कराया जाना है। इससे यहां कोई ट्रेन नहीं आएगी। आजमगढ़ से प्रवासियों से संबंधित ट्रेनें पड़ोसी बलिया, मऊ या जौनपुर आएंगी।
रोजवेज पर बढ़ेगा दबाव, हो सकती है अलग व्यवस्था
आजमगढ़। यदि आजमगढ़ के प्रवासियों से संबंधित ट्रेनें पड़ोसी जनपदों में आती है तो रोजवेज पर दबाव काफी बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में रोजवेज पर संभावित भीड़ को देखते हुए कुल अलग व्यवस्था की भी रणनीति बनाई जा रही है। भीड़ को कम करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है कि पड़ोसी जनपदों से बसों के माध्यम से प्रवासियों को सीधे शेल्टर होम भेज दिया जाए या फिर राजकीय पाली टेक्निक बलरामपुर या आईटीआई में अस्थाई बस अड्डा भी बनाया जा सकता है।