आजमगढ़। तरवां थाने में दर्ज गैंगेस्टर के मुकदमे में बृहस्पतिवार को बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की बांदा जेल से पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गैगेस्टर कोर्ट में हुई। मुख्तार ने प्रदेश सरकार पर विद्वेष की भावना से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
वर्ष 2014 में ठेकेदारी के वर्चस्व को लेकर मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने तरवां के ऐरा कला में सड़क का निर्माण करा रहे एक ठेकेदार पर हमला किया था। ठेकेदार तो बालबाल बच गया था लेकिन दो मजदूर गोली लगने घायल हो गए थे। बाद में एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत भी हो गई। इस मामले में तत्कालीन एसपी त्रिवेणी सिंह ने मुख्तार समेत दस आरोपियों पर गैंगेस्टर लगा दिया था। इसके बाद से ही मुख्तार की गैंगेस्टर कोर्ट में पेशी की कवायद चल रही थी। मुख्तार पंजाब के रूपनगर जेल में बंद था। गैंगेस्टर कोर्ट से वारंट बी जारी होने पर हर बार मेडिकल लगा देता था। इस वजह से उसकी जिला गैंगेस्टर कोर्ट में पेशी नहीं हो पा रही थी। वहीं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मुख्तार जब प्रदेश के बांदा जेल आ गया तो उसकी पेशी की राह सुलभ हो गई। इस बीच कोरोना का संक्रमण बढ़ जाने के चलते बृहस्पतिवार को वीसी के माध्यम से उसकी गैगेस्टर कोर्ट में पेशी हुई। सूत्रों के अनुसार 20 मिनट की पेशी के दौरान मुख्तार गुहार ही लगाता रहा और प्रदेश सरकार पर यह आरोप लगाया कि विद्वेष की भावना से उसे परेशान किया जा रहा है। जेल में अपनी सुरक्षा को लेकर भी उसने प्रश्नचिह्न लगाए। मुख्तार अंसारी की तरफ से उसके अधिवक्ता दरोगा सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि पेशी के दौरान मुख्तार ने बताया कि जेल से उसे परिजनों से भी बात नहीं करने दिया जा रहा है। जेल मैनुअल के हिसाब से उसे सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं।