सरायमीर में मजलिस में नौहा पढ़ कर खिराजे अकीदत पेश करते शिया समुदाय के लोग।
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सरायमीर। मोहर्रम शुरू होते ही इमामबाड़ों और अजाखानों को अलम, ताबूत और कुरान की आयतों वाले बैनरो से सजा दिया गया है। मकानों और सड़क के किनारे गम के प्रतीक काले झंडे लगाए गए हैं। कोरोना को ताजिया की अनुमति न मिलने और घर के अन्दर ही अजादारी करने के आदेश की वजह से इमामबाड़ों में सन्नाटा है। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी और अन्य लखनऊ के इमामबाड़े मे दिए शांतिपूर्ण धरने के बाद सरकार की ओर से इमामबाड़ों में मजलिस करने के आदेश के बाद कस्बे के सभी इमामबाड़ों और अजाखानों में मास्क, सैनिटाइजर और समाजिक दूरी के साथ मजलिस और मातम का सिलसिला शुरू हो गया है। शिया कमेटी सरायमीर के अध्यक्ष कायम रजा ने बताया कि सरकारी आदेश आने के बाद ही ताजिया रखा जाएगा। उधर, इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी में मौलाना मासूम असगर ने मजलिस के दौरान करबला की शहादत को बयां की तो अजादार रो पड़े। मजलिस में आरजू हुसैन, तौहीद हुसैन, अली अब्बास और हमनवा ने नौहा पढ़ कर खिराजे अकीदत पेश की। शिया कमेटी सरायमीर के मीडिया इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने बताया कि ताजिया व मजलिस का आदेश मिलने के बाद ताजियादारों में बेचैनी खत्म हुई है।
मेजवां : शायरे अहले बैत असगर बेलहरवी बताया कि मोहर्रम की सात तारीख महत्वपूर्ण है। इस दिन इमाम हुसैन का पानी बंद कर दिया गया गया था। इसी तरह आठ मोहर्रम हजरत अब्बास से मंसूब है। इस दिन जब हजरत अब्बास नहरे फोरात पर पानी लेने गए तो उनके दोनों हाथ कलम कर दिए गए। 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था। अंजुमन फरोगे अजा के सचिव रजील उल हसन ने बताया कि यदि सरकार जुलूस की इजाजत नहीं देती है तो हम जुलूस नहीं निकालेंगे। घर और इमाम बारगाह में शहीदाने करबला को खिराजे अकीदत पेश करेंगे। खाना वितरण के स्थान पर सूखी चीजें वितरित की जाएगी।