ऑपरेशन होने पर जुड़वा बच्चे पैदा हुए। जिसके एक बच्चे की मौत हो चुकी थी जबकि दूसरा बच्चा जिंदा है। ऑपरेशन के दो घंटे बाद कंचन की हालत बिगड़ने लगी। कंचन की हालत बिगड़ता देख क्लीनिक के संचालक डॉक्टर उसे लेकर फूलपुर के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जहां पर इलाज के दौरान दोपहर करीब दो बजे प्रसूता कंचन ने दम तोड़ दिया।
उधर परिजन चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिला व नवजात शिशु का शव लेकर शाम करीब चार बजे अहरौला थाने पहुंचे। जहां परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की। करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों से आए लोग सुलह-सझौते का प्रयास करते रहे।
काफी मशक्कत के बाद मामला सुलझा और परिजन शव को लेकर दाह संस्कार करने के लिए चले गए। मृतका कंचन की शादी तीन साल पूर्व हुई थी। बेटी के मौत की खबर सुनकर उसकी माता चंद्रिका देवी और पिता लालचंद का रो-रोकर बुरा हाल है।
इस मामले में अहरौला थानाध्यक्ष गजानंद चौबे ने बताया कि प्रसूता व नवजात की मौत के बार परिजन शव लेकर थाने पर आये थे जहां अस्पताल प्रशासन व पीड़ित परिवार के बीच बातचीत हुई। दोनों पक्षों में समझौता हो गया। जिसके बाद मृतका के परिजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले गए। थाने पर कोई तहरीर नहीं दी गई जिसके चलते कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ है।