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राज्य विवि की आधी से ज्यादा जमीन लो-लैंड

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आजमगढ़। सदर तहसील के मोहब्बतपुर में बनने वाले बहुप्रतिक्षित राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण में एक नया पेच आ गया है। लगभग 50 एकड़ में बनने वाले विश्वविद्यालय के लिए दी गई जमीन का आधा से अधिक हिस्सा लो-लैंड बताया जा रहा है। यह भूमि तमसा नदी के किनारे हैं और मोहब्बतपुर और शाहगढ़ से निकलने वाले दो बड़े ड्रेन से भी घिरी है। आशंका जताई जा रही है कि बाढ़ के दिनों में बनने वाले विश्वविद्यालय का लगभग 50 से 70 फ़ीसदी हिस्सा जलमग्न हो जाएगा। इस परिस्थितियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय के किनारे एक रिंग बंधा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसे बनाने की जिम्मेदारी तो बाढ़ खंड की होगी, लेकिन निर्माण खर्च विवि की डीपीआर में शामिल किया जाएगा। फिलहाल अभी इसे लेकर अंतिम रणनीति बनाई जा रही है।
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लोकसभा चुनाव से पहले जनपद के लिए घोषित किए राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए जमीन की खरीद अंतिम चरण में हैं। खरीद जल्द से जल्द पूरी करने की कोशिश की जा रही है, ताकि निर्माण को शुरू कराया जा सके। सूत्रों के अनुसार कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड की ओर से विवि के निर्माण के लिए आंगणन रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली गई है। इससे अब जल्द निर्माण शुरू करने के लिए दबाव बढ़ गया। मुख्यमंत्री सीधे इस पर नजर रख रहे हैं। जब निर्माण शुरू होने को है तो इसमें एक नया पेंच फंस गया है। विवि के लिए जो जमीन तलाशी गई है वो तमसा नदी के किनारे है। इसमें आधी से ज्यादा भूमि लो-लैंड बताई जा रही है। बाढ़ के दिनों में ये भूमि जलमग्न होती है। इसके साथ ही चिह्नित भूमि के किनारे से दो बड़े ड्रेन भी निकलते हैं। इसमें एक शाहगढ़ की ड्रेन बड़ा नाला है। मोहब्बतपुर ड्रेन सहायक नाला है। बाढ़ खंड विभाग की माने तो बाढ़ के दिनों में विवि परिसर का लगभग 50 से 70 फीसदी हिस्सा जलमग्न हो जाएगा। इससे खतरा भी बना रहेगा।
रिंग बांध बनाकर बचाएंगे विवि को
इससे निपटने के लिए पिछले दिनों जिलाधिकारी राजेश कुमार की बाढ़ खंड के एक्सईएन और कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन की बैठक भी हुई। प्रस्तावित विवि को इससे कैसे बचाया जाए, इसकी रणनीति तैयार की गई। बाढ़ खंड विभाग की ओर से विवि परिसर को जलमग्न होने से बचाने के लिए इसके किनारे रिंग बांध बनाने की सलाह दी गई। इस पर सहमति भी बन गई। फैसला हुआ कि बाढ़ खंड विभाग ही इसे बनाएगा। रणनीति बनाई गई कि रिंग बांध को भी विवि की डीपीआर में शामिल किया जाएगा और निर्माण के लिए बाढ़ खंड को कार्यदायी संस्था बनाया जाएगा। हालांकि अभी बाढ़ खंड इस बारे में आदेश का इंतजार कर रहा है।
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क्या है नियम
आजमगढ़। नियम है कि नदी के किनारे 50 मीटर और ड्रेन के किनारे 9 मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता है। विवि के निर्माण में इन नियमों का ध्यान रखना होगा। एनजीटी पहले ही इन नियमों को लेकर सख्त है। गंदगी, कूड़ा-कचरा आदि कारणों से नदियों में फैलने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए ये नियम बनाए गए हैं। इससे साथ निर्धारित एरिया के बाद निर्माण करने से इमारत पर खतरा भी रहता है।
अभी नहीं हो पाई चार एकड़ की खरीद
विवि के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें मोहब्बतपुर में 38.3095 एकड़ भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। परिसर के लिए 11.6905 एकड़ भूमि और रास्ते के लिए 4.2597 एकड़ भूमि की खरीद की जानी है। इसके लिए शासन से 19.13 करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। परिसर के लिए 7.5826 एकड़ और रास्ते के लिए 4.0285 एकड़ भूमि खरीदी जा चुकी है। अभी लगभग चार एकड़ भूमि परिसर के लिए खरीदी जानी है। काश्तकारों के बाहर होने से ये जमीन अभी नहीं खरीदी जा चुकी है। जबकि सीएम ने इसे सिंतबर में ही खरीदने के लिए निर्देश दिए थे।
विवि के लिए दी जमीन आधी से ज्यादा लो लैंड है। ये तमसा के किनारे हैं। वहीं दो बड़े ड्रेन भी इसके किनारे से निकलते हैं। बाढ़ के दिनों में इसमें पानी भर जाता है। विवि के जलमग्न होने से बचाने के लिए एक रिंग बांध बनाने का फैसला लिया गया है। अभी बनाने की मौखिक जिम्मेदारी हमारे पास है। आदेश जारी होने के बाद इस पर काम किया जाएगा।
दिलीप कुमार एक्सईएन, बाढ़ खंड
विवि के लिए दी गई जमीन के किनारे दो बड़े नाले निकल रहे हैं। इसी को लेकर रिंग बांध बनाया जाना है। कैसे बनेगा इस बारे में कार्यदायी संस्था ही जानकारी दे सकती है।
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हरिशंकर, सीआरओ
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