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कोरोना से सिर्फ मेडिकल कॉलेज में हुई 300 से अधिक की मौत

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आजमगढ़। कोरोना से जिले में कितने लोगों की मौत हुई, इसका विवरण न तो स्वास्थ्य विभाग के पास है और न ही जन्म-मृत्यु पंजीयन करने वाले विभाग के पास। मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भी काफी अंतर है। अकेले मेडिकल कालेज 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े में महामारी मेें 225 लोग ही काल कवलित हुए।
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कोविड के ज्यादा मरीजों का उपचार होम आइसोलेशन में हुआ। उनमें से सबको विभाग बिना पुष्टि के ही स्वस्थ घोषित करता रहा। यह जानने की जरूर नहीं समझी गई कि उनमें से कौन जिंदा है और किसकी मौत हो गई। होम आइसोलेशन ही नहीं निजी कोविड अस्पतालों में हुई मौतों का विवरण भी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ज्यादातर मृत्यु प्रमाण पत्र डाक्टरों ने कोविड का जिक्र तक नहीं किया है। सरकार ने न्यायालय में दिए गए हलफनामें में कहा गया है कि कोरोना से मौत के बाद जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में यदि कोविड-19 का जिक्र नहीं किया गया है तो ऐसी चूक करने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके बाद से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची हुई है। स्वास्थ्य विभाग जिले में 225 लोगों की मृत्यु का कारण कोविड बता रहा है जबकि अकेले मेडिकल कालेज में ही 300 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि मेडिकल कालेज के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक पांडेय ने की है।
दो सरकारी व चार प्राइवेट अस्पताल बने थे कोविड हस्पिटल
आजमगढ़। कोविड के मरीजों के इलाज के लिए जिले में दो सरकारी व चार निजी अस्पतालों को अधिकृत किया गया था। इसमें मेडिकल कालेज, 100 शैय्या अतरौलिया अस्पताल के अलावा निजी क्षेत्र के लाइफ लाइन, रमा हास्पिटल, वेदांता व सहज अस्पताल शामिल थे। हर अस्पताल में कोविड रोगियों की मौत हुई लेकिन राजकीय मेडिकल कालेज और लाइफ लाइन अस्पताल के अलावा किसी ने मरने वालों का विवरण नहीं जारी किया।
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जो पोर्टल पर चढ़ा है वहीं जानकारी विभाग उपलब्ध करा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में हुई मौत का डाटा एकत्र कराया जा रहा है। जल्द ही सभी के रिकार्ड जोड़कर सही डाटा विभाग उपलब्ध करा देगा।-डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ
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