आजमगढ़। जिले में बाहर घूमने वाले कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हालात यह हैं कि जिले में रोज 150 से अधिक कुत्तों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं, बावजूद इसके एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया छह महीने बाद भी शुरू नहीं हो सकी है।
शहर और कस्बों में बाहर घूम रहे कुत्तों की बढ़ती संख्या ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। पहले जहां 100 से 120 मरीज आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 150 से अधिक पहुंच गया है। अप्रैल में सिर्फ जिला अस्पताल में करीब 4000 मरीज पहुंचे, जबकि पूरे जिले में यह संख्या लगभग 4200 रही। इनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से थे। मई में भी अब तक 2600 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। कुत्तों के हमलों में लगातार वृद्धि के बावजूद नसबंदी अभियान अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
शासन के निर्देशों के तहत नगर निकायों को एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन चयन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब तक उपयुक्त स्थान तय नहीं किया जा सका है। नगर निकायों का कहना है कि एबीसी सेंटर के लिए लगभग डेढ़ एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जहां कुत्तों की नसबंदी, देखभाल और ऑपरेशन की सुविधा विकसित की जाएगी।
उधर, सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी पर रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं और मरीजों का उपचार लगातार किया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नसबंदी अभियान शुरू नहीं होगा, तब तक आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण मुश्किल है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि एबीसी सेंटर को जल्द स्थापित कर नसबंदी अभियान शुरू किया जाए, ताकि बढ़ते हमलों और दहशत पर रोक लग सके।
कुत्ते के काटने पर ऐसे करें प्राथमिक उपचार
- घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह से धोएं। इससे वायरस (लार) निकल जाता है।
- यदि खून बह रहा हो तो साफ कपड़े से हल्का दबाव डालकर रोकें।
- धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लोशन (जैसे बेटाडीन) लगाएं।
- घाव को एक साफ पट्टी या कपड़े से ढक दें।
- हल्दी, मिर्च पाउडर या कोई घरेलू पेस्ट न लगाएं। इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
ये है सटीक उपचार
रेबीज की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन बाद लगाया जाता है।
नगर पालिका की ओर से एबीसी सेंटर खोलने के लिए एसडीएम एसडीएम सदर को पत्र लिखा गया है। शहरी क्षेत्र में करीब डेढ़ एकड़ जमीन की आवश्यकता है। तहसील प्रशासन की ओर से जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के बाद एबीसी सेंटर खोलने की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी। प्रशांत कुमार, ईओ नगरपालिका आजमगढ़।