राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत होने वाले नये कार्य ठप पड़े हैं। अधिकारी और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं। ग्राम प्रधान भी चुनाव में व्यस्त चल रहे हैं। मनरेगा के तहत कार्य की गति बेहद धीमी होने के कारण गांवों में रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। हालांकि जिन कार्यों के लिए पहले बजट पास हो चुका है, वे कार्य अभी किए जा रहे हैं, जिससे कुछ लोगों को राहत मिल रही है। आचार संहिता लग जाने के कारण नये कार्य न होने से मनरेगा का काम प्रभावित हो रहा है।
गांवों में मानव दिवस सृजित कर ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने वाली इस योजना का संचालन प्रधान और सचिव के साथ ब्लाकों के अधिकारी ही कराते हैं। इस समय विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। गांवों के सभी प्रधान किसी न किसी पार्टी के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने में व्यस्त दिख रहे हैं। अधिकारी और कर्मचारी भी चुनावी तैयारियों में व्यस्त दिख रहे हैं। इसलिए गांवों में मनरेगा का काम लगभग ठप पड़ा हुआ है। जिले में मनरेगा की स्थिति पर एक नजर डालें तो सभी 1858 ग्राम पंचायतों में काम कराया जा रहा है। सात लाख 6382 परिवारों में से आठ लाख 21 हजार 725 लोगों के जॉबकार्ड बनाए गए हैं। ग्रामीण बेरोजगारों को गांव में ही काम मुहैया कराया जा रहा है। दो लाख 43 हजार 245 लोगों ने काम मांगा था जिसमें दो लाख 8572 परिवारों को काम दिया गया। इस साल अधिकाधिक मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए 76.22 लाख मानव दिवस सृजित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके सापेक्ष 77 लाख 28 हजार 174 मानव दिवस सृजित कराकर 5260 परिवारों को 100 दिन काम मुहैया कराया गया है।
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आचार संहिता का प्रभाव मनरेगा पर भी है लेकिन पहले से स्वीकृत कार्य कराये जा रहे हैं। ग्राम पंचायतें अपने यहां प्रस्ताव पारित कराकर अनुमति लेकर काम करा सकती हैं। आचार संहिता लगने से सिर्फ नये कार्य प्रभावित हुए हैं जो चुनाव समाप्त होने के बाद शुरू किए जाएंगे।-मिथिलेश कुमार तिवारी, उपायुक्त स्वरोजगार