आजमगढ़। मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में महज 15 रुपये की बढ़ोतरी से मजदूरों में नाराजगी है। शासन ने मजदूरी को 237 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 252 रुपये प्रतिदिन कर दिया है, जो एक अप्रैल 2025 से लागू होगा। लेकिन मजदूरों का कहना है कि बाजार में जहां 400 से 450 रुपये की दिहाड़ी मिल रही है, वहां 252 रुपये में दिनभर पसीना बहाने का कोई औचित्य नहीं है। नतीजतन, जिले के मनरेगा मजदूर सरकारी कामों से किनारा करते नजर आ रहे हैं।
जिले में कुल 5,75,401 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें से 3,24,906 मनरेगा मजदूर सक्रिय हैं। जिले में मनरेगा मजदूरों ने सरकारी कामों से दूरी बना ली है। मजदूरों का कहना है कि जब तक भुगतान समय पर नहीं होगा और मजदूरी बाजार के हिसाब से नहीं बढ़ेगी, तब तक मनरेगा की उपयोगिता सवालों के घेरे में रहेगी। अगर हालात नहीं सुधरे तो वे मजबूरी में निजी क्षेत्र में काम तलाशने को मजबूर होंगे। वैसे सरकार की ओर से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में 15 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पहले मजदूरों को 237 रुपये मजदूरी प्रतिदिन काम की मिलती थी। अब यह बढ़कर 252 हो गई है। मजदूरों का कहना है कि यह बढ़ोतरी नाकाफी है।
बोले मनरेगा कर्मी
इतनी मामूली बढ़ोतरी से परिवार का खर्च चलाना असंभव है। दूसरे यह मजदूरी कई-कई महीने बाद मिलती है इस दौरान हमें अपने परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। सरकार की सुस्ती हम मजदूरों पर भारी पड़ रही है। -सर्वेश यादव।
बाजार में 450 रुपये की मजदूरी मिल रही है, तो 252 रुपये में काम क्यों करें? यह राशि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी काफी नहीं है। मनरेगा मजदूरी को कम से कम 350 रुपये प्रतिदिन किया जाए और समय पर दिया जाए। -कालीचरण प्रजापति।
मनरेगा मजदूरों को 237 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलती थी, लेकिन शासन ने अब 252 रुपये प्रतिदिन मजदूरी तय कर दी है। पहली अप्रैल से बढ़ी मजदूरी लागू होगी।-राम उदरेज, उपायुक्त मनरेगा