आजमगढ़। तीन दिन से लापता सदर तहसील के अमीन सुरेश उपाध्याय का शव मंगलवार को सिधारी थाने से महज 700 मीटर दूर रामपुर गांव के सिवान में सरसो के खेत में मिला। मौके पर एडीएम प्रशासन राहुल विश्वकर्मा, एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह, सीओ सिटी शुभम जायसवाल के अलावा सिधारी थाना और शहर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड टीम ने भी जांच की। परिजनों ने प्रशासन और पुलिस लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी सक्रिय हो जाते तो सुरेश की हत्या नहीं होती।
शहर कोतवाली क्षेत्र के कोल बाज बहादुर निवासी सुरेश उपाध्याय (58) सदर तहसील में अमीन के पद पर कार्यरत हैं। 17 जनवरी यानी शनिवार को लगभग 10.22 बजे तहसील सदर में उपस्थित थे। सुरेश उपाध्याय वसूली कार्य के लिए चौक एवं सिधारी क्षेत्र की ओर निकले थे लेकिन घर नहीं पहुंचे।
परिजनों ने उनकी तलाश की लेकिन वह नहीं मिले। इसके बाद शहर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। सुरेश उपाध्याय की तलाश के लिए परिजन पूरे दिन शहर के चक्कर काट रहे थे। आखिरी लोकेश उनकी सिधारी क्षेत्र में मिली थी। परिजन के साथ-साथ पुलिस भी उनकी तलाश कर रही थी। इसी बीच मंगलवार की शाम करीब पांच बजे पुलिस को सूचना मिली कि रामपुर गांव के सिवान में सरसो के खेत में एक शव पड़ा है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का शिनाख्त किया तो वह अमीन सुरेश उपाध्याय निवासी बाज बहादुर शहर कोतवाली के रूप में हुई। घटना की जानकारी मिलते ही उनके दोनों बेटे भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना था कि यदि समय रहते पुलिस सचेत होती तो शायद ऐसी घटना ही नहीं होती। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। सूचना मिलते ही भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अखिलेश मिश्रा सहित अन्य भाजपा नेता मौके पर पहुंच गए।
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घटना स्थल से 150 मीटर दूर मिली बाइक
आजमगढ़। सिधारी थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के सिवान में सरसो के खेत में अमीन सुरेश उपाध्याय का शव मिला। वहीं, उनकी बाइक शव से करीब 150 मीटर दूरी पर खड़ी मिली। गाड़ी के नंबर प्लेट को देखकर ऐसा लग रहा था कि गाड़ी के नंबर प्लेट पर लगी मिट्टी जानबूझकर लगाई गई है। ताकि कोई गाड़ी के नंबर प्लेट से गाड़ी की पहचान न कर ले। तीन दिन से खड़ी बाइक को स्थानीय लोग रोज देखते थे लेकिन किसी ने ऐसी आशंका नहीं जताई थी।
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कहीं आरसी प्रकरण तो नहीं बना अमीन की मौत की वजह
आजमगढ़। मृतक संग्रह अमीन सुरेश उपाध्याय की मौत के पीछे प्रशासनिक दबाव और आरसी प्रकरण को लेकर उठ रहे सवाल अब और गहरे हो गए हैं। मृतक के साढ़ू हरिबंश मिश्रा ने मामले को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हरिबंश मिश्रा के अनुसार सुरेश उपाध्याय द्वारा एक युवती के नाम आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की गई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से लगातार वसूली का दबाव बनाया जा रहा था, जबकि संबंधित युवती का कोई स्पष्ट पता या सुराग नहीं मिल पा रहा था। बाद में कहीं से सूचना मिली कि युवती की शादी अहरौला क्षेत्र में हो चुकी है। मामले को लेकर सुरेश उपाध्याय हाईकोर्ट भी गए थे, जहां से उन्हें राहत तो मिली, लेकिन घर लौटने के बाद वह बेहद डरे और मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। परिजनों के अनुसार उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि उन्हें और उनके बच्चों को जान का खतरा है। हरिबंश मिश्रा ने आरोप लगाया कि जब सारी जानकारी प्रशासन को दी गई, तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो सुरक्षा दी गई और न ही मामले की गंभीरता को समझा गया। अब उनकी मौत के बाद परिजन प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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अमीन संघ के सदस्यों ने किया धरना प्रदर्शन
आजमगढ़। सदर तहसील में तैनात संग्रह अमीन सुरेश उपाध्याय की गुमशुदगी के मामले में पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इसी को लेकर मंगलवार को संग्रह अमीन संघ के पदाधिकारी और सदस्य धरने पर बैठ गए। संघ के अध्यक्ष विपिन कुमार सिंह ने कहा कि अमीन के लापता होने के इतने दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल्द से जल्द सुरेश उपाध्याय की तलाश कर उन्हें सुरक्षित बरामद नहीं किया गया तो संघ आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा।धरने के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन से निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की। इस अवसर पर संघ के मंत्री रामभवन प्रसाद, उपाध्यक्ष शशिकांत वर्मा, कमलेश यादव, कृष्ण यादव, कन्हैया लाल, हृदय नारायण, चंद्रभूषण, प्रेम कुमार, सुरेंद्र राम सहित बड़ी संख्या में संग्रह अमीन मौजूद रहे।
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घटना से जुड़े अहम सवाल-
- थाने से मात्र 700 मीटर दूर तीन दिन तक शव कैसे पड़ा रहा, पुलिस को भनक क्यों नहीं लगी?
- जब आखिरी लोकेशन सिधारी क्षेत्र की मिली थी, तो उसी इलाके में सघन तलाशी क्यों नहीं हुई?
- 130–150 मीटर दूर खड़ी बाइक तीन दिन तक दिखती रही, फिर भी किसी ने क्यों नहीं संज्ञान लिया?
- बाइक की नंबर प्लेट पर जानबूझकर मिट्टी लगाई गई थी या कहीं गिरने से लगी थी?
- गुमशुदगी दर्ज होने के बाद प्रारंभिक 24 घंटे में पुलिस की कार्रवाई कितनी प्रभावी थी?
- वसूली कार्य पर निकले अमीन को कोई सुरक्षा या फील्ड सपोर्ट क्यों नहीं दिया गया था?
- आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) प्रकरण को लेकर अमीन पर असामान्य दबाव क्यों बनाया जा रहा था?
- संग्रह अमीन संघ के धरने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई में तेजी क्यों नहीं आई?
- क्या यह साधारण मौत है या फिर पूर्व नियोजित हत्या?
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कोट-
सदर तहसील के अमीन सुरेश उपाध्याय 17 जनवरी को वसूली के लिए निकले थे लेकिन घर नहीं पहुंचे। परिजनों की तहरीर पर शहर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज की गई थी। शाम को सिधारी थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के सिवान में सुरेश का शव पाया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - मधुबन कुमार सिंह, एसपी सिटी आजमगढ़।
33 मृतक अमीन सुरेश की फाइल फोटो। श्रोत-सोशल मीडिया- फोटो : पुलिस लाइन स्थित परिवार परामर्श केंद्र का उद्घाटन करतीं एडीजी अनुपमा कुलश्रेष्ठ साथ में मौजूद डीआईजी आगरा शैलेश पांडेय और एसएसपी सौरभ दीक्षित। स्रोतः पुलिस