आजमगढ़। कोविड-19 के उपचाराधीनों की मदद को हर पल तत्पर रहने वाले देश के करीब 800 चिकित्सकों ने कोरोना की चपेट में आकर अपने प्राणों की आहुति दी है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष एवं कोरोना टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ. सूर्यकांत ने इन शहीद चिकित्सकों पर एक लेख इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित किया था। उनकी यह पहल रंग लाई। विभिन्न संस्थाएं इन दिवंगत चिकित्सकों के परिवार की मदद को आगे आई हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश व बिहार के 12 चिकित्सकों के प्रति रविवार को आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि डॉ. सूर्यकान्त रहे और संचालन आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने किया।
डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि जिस तरह से देश की सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैन्यकर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाता है, उसी प्रकार कोरोना से लोगों के प्राणों की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले डाक्टरों को भी शहीद का दर्जा दिया जाए। ‘जर्नी ऑफ़ कोविड वारियर’ को पढ़ने के बाद कई संस्थाओं ने आईएमए और उनसे संपर्क साधा और प्रस्ताव रखा कि वह सही मायने में इन कोविड वारियर के परिवारों की मदद को आगे आना चाहते हैं। कोरोना उपचाराधीनों के इलाज के दौरान जान गंवाने वाले देश के 800 डाक्टरों में से 300 डाक्टरों के परिवारों को आर्थिक मदद का प्रस्ताव फार्मा कम्पनी मैनकाइंड ने रखा, जिसे आईएमए ने स्वीकार करते हुए उनकी इस पहल की सराहना की है। रविवार को उत्तर प्रदेश और बिहार के जान गंवाने वाले 12 डाक्टरों को श्रद्धांजलि अर्पित कर इस मुहिम की शुरुआत कर दी गई है। प्रदेश के प्रयागराज के डॉ. एम. वकील खान, आजमगढ़ के डॉ. मोहम्मद असद, घोसी-मऊ के डॉ. मोहिब्बुल हक़, गोरखपुर के डॉ. रजनीकान्त श्रीवास्तव, वाराणसी के डॉ. जंग बहादुर, बरेली की डॉ. राशिम दुरेजा व डॉ. सुरेश सोढी, कानपुर के डॉ. कवलजीत सलूजा व डॉ. ज्ञान प्रभाकर, गोंडा के डॉ. रघुनाथ प्रसाद मिश्र, उरई जालौन के डॉ. सुनील अग्रवाल और बिहार के पटना जिले के डॉ दीपक कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।