महराजगंज में प्रधान सिंहासन यादव की हत्या के बाद हुए बवाल के आरोपियों की धरपकड़ के नाम पर पुलिस ने कस्बे के दूकानदारों केे घर में घुसकर मारपीट, लूटपाट और तोड़फोड़ की।
पुलिस से भयभीत एक दूकानदार ने घटना के संबंध में साक्ष्य और सबूत जुटाने के बाद रविवार को परिवार के साथ डीआईजी रेंज से मिलकर पूरे मामले की जांच करवाकर दोषी पुलिस वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
महराजगंज कस्बे के मौलाना आजाद नगर कुजराटोला निवासी मोतीलाल जायसवाल कस्बे के बड़े कपड़ा व्यवसाई हैं। इनका भाई राजेश जायसवाल का मकान और दूकान सुभाष चंद्र बोस नगर मुहल्ले में है।
यहीं पर वह परिवार के साथ रहता है। मोतीलाल का आरोप है कि 29 अक्तूबर की शाम प्रधान सिंहासन यादव की हत्या के बाद थाना फूंकने के मामले में पुलिस ने 10 नामजद और 600 अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई।
नामजद आरोपियों में राजेश जायसवाल का नाम भी शामिल है। जबकि घटना के वक्त राजेश घर पर मौजूद ही नहीं था। तीन नवंबर की भोर में करीब तीन बजे दो दर्जन से अधिक पुलिस वालों ने राजेश की दूकान और घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। पानी की टंकी तोड़कर उठा ले गए।
इसके बाद बगल में टुनमुन हलवाई का शटर तोड़कर उसके घर के रास्ते से राजेश के घर में घुसकर महिलाओं और बच्चों को मारापीटा। 25 हजार रुपया, चार मंहगे मोबाइल ले जाने के साथ ही घर में लाखो रुपये के सामान तोड़कर नष्ट कर दिए।
मोतीलाल ने शक जाहिर किया कि पुलिस कहीं उसके भाई को फर्जी तरीके से आरोपी न बना दे। इसलिए इस पूरे मामले की जांच करवाकर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और गलत ढंग से आरोपी बनाए गए राजेश जायसवाल का नाम मुकदमे से हटाने की मांग की है।