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महंत के समाधि स्थल पर विवाद

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शहर के गौरीशंकर घाट पर स्थित संतोषी माता मंदिर के महंत की मौत के बाद  मंदिर की जमीन में महंत की समाधि बनाने के मुद्दे पर विवाद हो गया।
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 मंदिर से लगी जमीन में समाधि देने पर मुहल्ले के एक व्यक्ति ने ऐतराज जताते हुए वहां समाधि देने से मना कर दिया। इस पर दोनों तरफ के लोग आमने-सामने हो गए।

घटना की सूचना मिलने पर एसडीएम सदर, सीओ नगर मौके पर पहुंचे। तभी परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव भी वहां  आ गए।

उनके निर्देश पर एसडीएम और सीओ ने करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विवाद का निस्तारण करवाकर महंत को समाधि दिलवाई।

महंत भृगुदासजी महराज (90) गौरीशंकर घाट मुहल्ले में स्थित मां संतोषी माता मंदिर के पुजारी थे। शुक्रवार की रात उनका निधन हो गया।

शनिवार की सुबह इसकी जानकारी भक्तजनों को हुई तो भारी तादात में वहां लोग इकट्ठा हो गए। मंदिर परिसर से सटी मंदिर की जमीन में महंत की समाधि बनाने के लिए गड्ढा खोदा जाने लगा।
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तभी मुहल्ले के कतवारु निषाद वहां पहुंचे और उक्त जमीन में समाधि देने से मना कर दिया। इससे भक्तों और कतवारु के समर्थक आमने-सामने हो गए।

इसकी जानकारी होने पर एसडीएम सदर अयोध्या प्रसाद, सीओ नगर केके सरोज और शहर कोतवाल मो. ईशा खां भी मौके  पर पहुंच गए।

 अधिकारियों ने पहले बातचीत के जरिए मामले का हल निकालने का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनी। अभी बातचीत का दौर चल ही रहा था कि परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव भी वहां पहुंच गए।

लोगों ने बताया कि जिस स्थान पर समाधि दी जा रही है। वहीं इससे पूर्व भी दो महंतों को समाधि दी गई है। उसी के बगल में भृगुदास जी की समाधि बनाई जा रही है।

मुहल्लेवासियों से वार्ता करने के बाद कैबिनेट मंत्री अधिकारियों को विवाद निपटाने का आदेश देकर चले गए। काफी मशक्कत के बाद भी विवाद न सुलझने पर एसडीएम ने तहसील से जमीन के रिकार्ड मंगवाए व सुबह 11 बजे से चल रहा विवाद करीब सात घंटे बाद समाप्त हुआ।
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महंत को वहीं थोड़ी दूरी पर मंदिर की जमीन में ही समाधि दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। एसडीएम सदर अयोध्या प्रसाद ने बताया कि जिस स्थान पर समाधि दी जा रही थी।

वह मंदिर के नाम दर्ज है।  पर विवाद को देखते हुए जिस स्थान पर जमीन खोदी जा रही थी। उससे थोड़ी दूरी पर मंदिर की जमीन में ही समाधि दिलाई गई है।
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