रानी की सराय। जनपद के गोवंश पशुओं में लंपी स्किन रोग तेजी से फैल रहा है। बीमारी एक वायरस की तरह ही पशुओं में फैल रही है। दुधारू पशु भी बीमार होने से दूध पर संकट होने लगा है। बीमारी रोक थाम के लिए उपचार के साथ पशुपालन विभाग पशुपालकों को जागरूक कर रहा है। टीमें क्षेत्र में जाकर पशुओं की जांच कर रहे और किसान व पशुपालकों को बचाव के बारे में जानकारी दे रहे हैं।जिले में 22 विकास खंड हैं।
विभाग की माने तो लगभग सभी विकास खंडों में लंपी का प्रकोप बढ़ रहा है। विकास खंड रानी की सराय में हरिकिशुनपुर गांव में लंपी से ग्रसित एक गाय मिली। इसी प्रकार पल्हनी, रानी की सराय, मोहम्मदपुर, रौनापार, कोयलसा व तहबरपुर सहित अन्य ब्लाकों में लपीं से ग्रसित पशु मिल रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्सक डाॅ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि मवेशियों को मच्छर व मक्खियों के काटने से लंपी रोग फैलता है। गायों को मच्छरों व मक्खियों से काटने से बचाने के लिए नीम के पत्तों को धुईंहर करना चाहिए। संभव हो तो मवेशी के शरीर पर नीम तेल भी लगाना चाहिए। भैंस की चमड़ी मोटी होने से मच्छरों व मक्खियों के काटने का असर कम होता है। वर्तमान समय में 50 से अधिक पशुओं में लंपी का लक्षण मिले हैं। पशुपालन विभाग ने संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सीमावर्ती इलाकों में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है।
पशुपालन विभाग की टीमें गांवों में घर-घर जाकर मवेशियों की जांच कर रही हैं। जहां भी लक्षण मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीकाकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. मुकेश गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों की टीम ने 40 हजार से अधिक मवेशियों को लंपी वायरस से बचाव का टीका लगाया जा चुका है, जबकि विभाग का लक्ष्य 25 हजार पशुओं के टीकाकरण का है।