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‘दलालों ने किया रंगमंच का बाजारीकरण’

Sun, 21 Feb 2016 11:40 PM IST
भारतेंदु मिश्र
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पूर्व और आज के रंगमंच में काफी अंतर है। कलाकारों के फिल्मी रुझान के चलते पारसी थिएटर युग का क्रेज खत्म हो रहा है।  यह और भी दुखद है कि कुछ दलाल किस्म के लोग इसका बाजारीकरण करने में तुले हुए हैं। फिर भी कुछ जुनूनी कलाकारों की वजह से रंगमंच आज भी जिंदा है और एक मुकाम हासिल कर रहा है।
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ये बातें वरिष्ठ रंगमंचकर्मी और हास्य अभिनेता रघुवीर यादव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहीं। यादव रविवार को जिला मुख्यालय पर सूत्रधार के तत्वावधान में आयोजित आरंगम में चर्चित नाटक ‘पियानो’ की प्रस्तुति देने आए हुए थे। शारदा सिनेमाघर के प्रांगण में उन्होंने कहा कि एक समय था कि जब पारसी थिएटर बुलंदियों पर था, पर फिल्मी चकाचौंध ने इसे हाशिये पर ढकेल दिया। पर आज भी कुछ जुनूनी कलाकार इसके लिए संजीवनी का काम कर रहे हैं। आज भी इस विधा से जुड़कर कलाकार अपना जीविकोपार्जन कर सकते हैं।

यादव ने कहा कि अभिषेक और ममता पंडित जैसे कलाकार रंगमंच के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर चुके हैं। कहा कि बीच में एक दौर आया था जब रंगमंच अपने अभाव के चलते पिछड़ रहा था, पर आज ऐसा नहीं है, आज रंगमंच के पास पैसा के साथ साधन और संसाधन भी है, जरूरत बस शिद्दत और लगन से काम करने की है।
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ईमानदार कलाकार और संस्थाएं ठीक तरीके से काम कर रंगमंच को एक दिशा और मुकाम देने में जुटी हैं। यादव ने कहा कि शायद यही वजह है कि फिल्मी चकाचौंध में जाने के बाद भी मैं खुद को रंगमंच से अलग नहीं कर पाया। यादव ने ओमपुरी, गिरीश कर्नाड, नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर, शबाना आजमी, आलोक नाथ आदि का नाम लिया, जो खुद को तरोताजा करने के लिए समय-समय पर रंगमंच पर नजर आते हैं। कहा कि बताया कि यह सत्य है कि अभाव और संघर्ष ही मनुष्य को कंचन बनाता है, रंगमंच वही प्लेटफार्म है।

इस लिए हम कलाकारों से अपील करते हैं कि अगर फिल्मों में सफल होना है तो पहले वो रंगमंच ज्वाइन करें। उन्होंने कहा कि स्कूलों में भी रंगमंच की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि इसमें जीवन के कई रंगों को जीने की संभावना होती है।


बयां किया एकाकीपन का दर्द : सूत्रधार संस्थान द्वारा आठ फरवरी से आयोजित 11वें रंग महोत्सव 'आरंगम' का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर फिल्म अभिनेता रघुवीर यादव द्वारा प्रस्तुत नाटक 'पियानो' सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। रघुवीर यादव के शानदार अभिनय हर कोई अभिभूत नजर आया। वहीं प्रसिद्ध रंगकर्मी संजय उपाध्याय को सूत्रधार सम्मान से सम्मानित किया गया।

11वां रंग महोत्सव आरंगम प्रसिद्ध रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता स्व. जुगल किशोर जी को समर्पित रहा। इसमें पहली बार सूत्रधार सम्मान की घोषणा हुई। यह सम्मान प्रख्यात रंगकर्मी और मध्य प्रदेश ड्रामा स्कूल के निदेशक संजय उपाध्याय को प्रदान किया गया। नाट्य संध्या के अंतिम दिन मशहूर फिल्म अभिनेता रघुवीर यादव द्वारा 'पियानो' का मंचन किया गया। नाटक 'पियानो' सत्तर के दशक में जब सिर्फ टेलीफोन या खतों के जरिए ही दूरदराज से बातचीत हो पाती थी, उस दौर में मोबाइल, कंप्यूटर वगैरह लोगों के पास नहीं हुआ करते थे।

 उसी वक्त के दरमियान मुंबई के अलग-अलग जगह के फ्लैट में दो इंसान अपनी बेमानी जिंदगी से जूझ रहे होते हैं। एक पियानो बेचना चाहती है और दूसरा खरीदना चाहता है। आदमी लगातार फोन पर अलग-अलग खरीददार बनकर मिसेज डिसिल्वा का जीना मुश्किल कर देता है लेकिन वह वक्त गुजारने का नायाब सा तरीका हासिल कर लेता है। दो तन्हा जिंदगियों को ट्रैजीकौमिक सफर से गुजरते हुए किस मुकाम पर पहुंचा देता है। पियानो इसी कहानी को बयां करता है।

पियानो कहानी का मूल उद्देश्य यह है कि समाज में रहते हुए भी लोग एकाकीपन में जी रहे हैं। रघुबीर यादव और रोशनी अचरेजा का संजीदा अभिनय और अबीर यादव के सुंदर वायलिन वादन ने प्रेक्षागृह में बैठे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिस रघुबीर यादव को लोग केवल टीवी पर देखते थे, आज अपने बीच में पाकर खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।

इस मौके पर नागेंद्र, बृजेश्वर सिंह, फौजदार सिंह, इंद्रासन राय, सुदर्शन अग्रवाल, डा. अमित सिंह, डा. अनूप कुमार सिंह, डा. एके सिंह, मदन मोहन पांडेय, कुलभूषण सिंह, नित्यानंद मिश्रा, डा. हेमबाला यादव, प्रवीण सिंह, पंकज अग्रवाल आदि उपस्थित थे। संस्था के अध्यक्ष डा. सीके त्यागी, सचिव अभिषेक पंडित और आरंगम संयोजक  ममता पंडित ने आभार व्यक्त किया।
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