चुनावी जनसभा में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य
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प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश से गुंडाराज और भ्रष्टाचार को खत्म करने का काम किया। अपराधियों की कमर तोड़ने को बुलडोजर चलवाया। आगे भी यह कवायद जारी रहेगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा दिया लेकिन सपा-बसपा के साथ मिल कर गरीबी हटाने के बजाए गरीबों को मिटाने का काम किया गया।
कांग्रेस, सपा और बसपा की सरकारों में मात्र 15 प्रतिशत धनराशि ही योजनाओं में खर्च होता था। 85 प्रतिशत धनराशि नेता हजम कर जाते थे। लेकिन वर्तमान सरकार में ऐसा नहीं है। प्रत्येक योजना की धनराशि उसी योजना में खर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि सपा का मतलब अब समाजवादी नहीं बल्कि समाप्तवादी पार्टी हो गया है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की चुनावी जनसभा में पूर्व सपा विधायक कल्पनाथ पासवान ने एक बार फिर से भाजपा का दामन थाम लिया। इसके अलावा बसपा नेता सिकंदर कुशवाहा भी भाजपा में शामिल हो गए। दोनों नेताओं ने दिनेश लाल यादव निरहुआ के लिए लोगों से समर्थन मांगा।
कौन हैं कल्पनाथ पासवान
कल्पनाथ पासवान भाजपा के पुराने नेता हैं। वे जनसंघ से एक बार विधायक भी रह चुके हैं। काफी लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहने के बाद उन्होंने सपा का दामन थाम लिया था। सपा के टिकट पर 2017 में मेंहनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक बने। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनके स्थान पर पूजा सरोज को प्रत्याशी बनाया। जिससे वह काफी नाराज थे।
सोमवार को जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शाहगढ़ में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जनसभा को संबोधित करने के लिए पहुंचे तो कल्पनाथ पास और बहुजन समाज पार्टी के सिकंदर कुशवाहा ने समर्थकों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया।
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने आजमगढ़ उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली को समर्थन देने की घोषणा की है। सोमवार को बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली व राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के प्रवक्ता तलहा रशादी द्वारा संयुक्त प्रेसवार्ता में इस बात की जानकारी दी गई। तलहा रशादी ने कहा कि राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल इस चुनाव में भाग नही ले रही है और हम तटस्थ थे। लेकिन पिछले चंद दिनों में जिस प्रकार से भाजपा व सपा द्वारा तुष्टीकरण और ध्रुवीकरण का माहौल बनाया जा रहा है।
पूरे आजमगढ़ में दोनों दलों के बाहरी नेताओं ने जमघट लगाया हुआ है इससे एक बार फिर ये साफ है कि सपा-भाजपा दोनों दलों के लिए इस चुनाव में स्थानीय विकास कोई मुद्दा ही नहीं है। साथ ही बाहरी प्रत्याशियों को लड़ाकर दोनों दल आजमगढ़ को पॉलिटिक्ल टूरिज्म का अड्डा बना रहे हैं। क्या आजमगढ़ में कोई ऐसा नेता नहीं है, इन दलों के पास जो आजमगढ़ का नेतृत्व कर सके?