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घनी आबादी के बीच दुकानें मिलने पर सात का लाइसेंस निरस्त

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आजमगढ़। हाल ही में मुकेरीगंज में पटाखा की दुकान में हुए अग्निकांड ने 14 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। घटना के बाद तीन दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे। इसके बाद भी शस्त्र विभाग की मिलीभगत से घनी आबादी के बीच पटाखों की दुकानें चल रही हैं। दीपावली से पहले डीएम एनपी सिंह ने जांच कराई तो सात दुकानें नियम विपरीत घनी आबादी के बीच संचालित होती मिलीं। डीएम ने सभी दुकानों के लाइसेंस को निरस्त कर दिया।
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कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र कार्यालय की ओर से जारी किए जाने पटाखा दुुकानों के लाइसेंस आवंटन और नवीनीकरण में मानक की अनदेखी की जाती है। इसमें तहसील स्तर से लगने वाली रिपोर्ट में जमकर सहयोग किया जाता है। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से लोग दुकानों का लाइसेंस जारी करा लेते हैं और आबादी के बीच दुकान और गोदाम बना लेते हैं। एक बार लाइसेंस जारी हो गया तो विभाग की ओर से कभी इसके सत्यापन और निरीक्षण की भी जरूरत नहीं समझी जाती है। डीएम द्वारा कराई गई जांच में नगर कोतवाली क्षेत्र में हाफिजपुर निवासी नरेंद्र चौहान पुत्र रामलौटन चौहान, सरायमीर के खानकाह निवासी लालजी पुत्र यदुवर, दीदारगंज के आमगांव निवासी रामसवट पुत्र धर्मदेव, मुबारकपुर के पुरा दीवान निवासी अफसर हुसैन पुत्र फैयाज हुसैन और पुरानी बस्ती निवासी लक्ष्मीनारायण पुत्र रघुवीर, देवगांव कोतवाली क्षेत्र के कटघर लालगंज निवासी महेंद्र प्रसाद पुत्र स्व. रामकिशुन और कटघर लालगंज के ही निवासी धर्मेंद्र उर्फ भोला पुत्र लालमनी की दुकानें घनी आबादी में मिलीं। इनके लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। डीएम एनपी सिंह ने बताया कि दीपावली के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए पटाखा की दुकानों को अस्थायी रूप से आबादी से दूर स्थापित करने के लिए एसडीएम, सीओ, मुख्य अग्निशमन अधिकारी द्वारा जगह का चिन्हांकन किया जाएगा। अस्थायी पटाखा की दुकानों को स्थापित करने की अनुमति एसडीएम द्वारा दी जाएगी।
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