लाटघाट। घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही देवारा क्षेत्रवासियों की मुसीबतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। तेजी से बढ़ती घाघरा की धारा को देख किसान पहले से ही चिंतित थे, वहीं महुला-गढ़वल बांध के सहनूपुर रेगुलटर में रिसाव होने से किसानों में हड़कंप मच गया। किसानों की 50 बीघा धान की फसल पानी में जलमग्न हो गई है।
बरसात का मौसम शुरू होने से पूर्व प्रशासन ने तैयारियों के पूूरा होने का दावा किया था, लेकिन घाघरा में बढ़े जलस्तर ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। रेगुलेटर की मरम्मत किस प्रकार विभागीय कर्मचारियों द्वारा की गई है। इसका नजारा सहनूपुर रेगुलेटर को देखकर लगाया जा सकता है।
रेगुलेटर से हुए रिसाव के कारण दर्जनों किसानों की धान की फसल जलमग्न हो गई। सहनूपुर गांव निवासी राजेंद्र का एक बीघा, रोली दो बीघा, बसंत एक विघा, राजेश तीन बीघा, कन्हैया, उमराव दो बीघा, दिलीप तीन बिघा, ओमप्रकाश एक बिघा, जंक्शन दो बीघा, विंदो दो बीघा, पंजाबी तीन बीघा, अमृत एक बीघा, रोहित एक बीघा, चंद्रभान एक विघा, रामसिंह दो बीघा, मुन्ना एक बीघा, अरविंद एक बिघा, चंद्रभान एक विघा, राजेंद्र प्रधान दो बीघा फसल डूब गई।
रेगुलेटर से रिसाव पर्शिया में भी हो रहा है। घाघरा नदी के जलस्तर का दबाव कम है नहीं तो बंधे को खतरा बढ़ जाता। ऐसी स्थिति में भी बाढ़ खंड, सिंचाई विभाग के लोग लापरवाही दिखा रहे हैं।