आजमगढ़। किसी भी कॉलोनी को विकसित करने के लिए आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) से ले आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है। इसके बाद भी सिधारी क्षेत्र में बिना ले-आउट स्वीकृत कराए ही बिल्डर द्वारा पूरी की पूरी कॉलोनी बसा दी गई।
उसके द्वारा 100 से अधिक प्लॉटों को काटकर उनकी बिक्री कर दी गई। एडीए एक बार इसे ढहाने के बाद फिर इसे देखने नहीं गया।
नगर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का बिल्डरों द्वारा जाल बिछा दिया गया है। जबकि आजमगढ़ विकास प्राधिकरण क्षेत्र में कोई भी बिल्डर पंजीकृत नहीं है। इसके बाद भी एडीए बिल्डरों द्वारा बसाई जाने वाली नई अवैध कालोनियों पर रोक नहीं लगाई जा पा रही है।
नगर के सिधारी थाने से दक्षिण तरफ मिश्रित भूमि नई महायोजना में घोषित की गई है। इस भूमि के मिश्रित आबादी क्षेत्र घोषित होने से पहले ही किसी बिल्डर ने यहां पर अपना तामझाम फैला दिया था।
जबकि इस भूमि का लेआउट भी एडीए से स्वीकृत नहीं कराया गया। उसके द्वारा किसानों से औने-पौने दामों पर जमीन की खरीद कर 100 से अधिक प्लाट काटकर बिक्री शुरू कर दी गई। जानकारी के बाद एक बार एडीए द्वारा इस अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया गया लेकिन इसके बाद उसकी सुधि नहीं ली गई।
इसका परिणाम है कि यहां पर ज्यादातर प्लाट की बिक्री हो चुकी है। यहां तक कि कुछ खरीदारों ने भवन का निर्माण भी शुरू कर दिया है। सबकुछ जानते हुए भी एडीए के कर्मचारी मौन साधे हैं।