आजमगढ़। जनपद में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण में कोई डेवलपर पंजीकृत नहीं है। इसके बाद भी जनपद में जगह-जगह भू-माफिया बिल्डर प्लाटिंग का कार्य धड़ल्ले से करा रहे हैं। किसी बिल्डर की ओर से अब तक ले आउट पास नहीं कराया है। इसके बाद भी धड़ल्ले से जगह-जगह प्लाटिंग कर जमीन की बिक्री की जा रही है।
जनपद के सुव्यवस्थित विकास के लिए वर्ष 2008 में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। स्थापना के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जिले का अब समुचित विकास होगा। लेकिन, विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अवैध रूप से निर्मित होने वाले भवनों को नोटिस जारी करने और फिर उगाही कर उनका निर्माण कराने में जुटे रहे। इतना ही नहीं जिले में कोई भी बिल्डर पंजीकृत न होने के बाद भी शहर के चारो तरफ भू-माफिया अवैध रूप से प्लाटिंग कराकर जमीन की खरीद और बिक्री करते रहे और अवैध काॅलोनियां बसाते रहे। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सोते रहे। वर्तमान में भी शहर के चारों तरफ अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। वहीं विभाग को जिले में बसी अवैध कालोनियों के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं है। ना ही वह अब तक कभी इस जानकारी को जुटाने का प्रयास ही किया। परिणाम यह है कि भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उनके द्वारा जगह-जगह प्लाटिंग कराकर जमीनें बेची जा रही हैं।
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ले आउट स्वीकृत कराने के यह हैं नियम
- किसी भी जमीन के लेआउट में सबसे पहले सामने की ओर का मुख्य मार्ग 18 मीटर चौड़ा होना चाहिए।
- इसके बाद 12 मीटर फिर आगे चलकर गलियों में इसकी चौड़ाई कम से कम नौ मीटर होनी चाहिए।
- काॅलोनी में पार्क और व्यावसायिक जगह होनी चाहिए।
- पानी के शोधन के लिए एसटीपी का व्यवस्था होनी चाहिए।
- बिजली आपूर्ति के लिए ट्रांसफाॅर्मर और पोल के साथ तार होने चाहिए।
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मात्र एक काॅलोनी का है ले-आउट है मंजूर
नगर क्षेत्र में वैसे तो सैकड़ों काॅलोनियां बस गई हैं। लेकिन, अगर ले आउट की बात करें तो सिर्फ नगरपालिका की ओर से बसाई गई हरिऔध नगर काॅलोनी का ले-आउट ही स्वीकृत हुआ है। हर्रा की चुंगी क्षेत्र में आवास विकास की ओर से भी काॅलोनी बसाई गई है। लेकिन, उसका भी ले-आउट स्वीकृत नहीं है।
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प्राधिकरण की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर अवैध रूप से की गई प्लाटिंग को ध्वस्त कराया जाता है। जो लोग अवैध रूप से बिना मानचित्र के निर्माण कराते हैं, उनको नोटिस जारी करते हुए सील करने की कार्रवाई की जाती है। आगे भी हमारी यह कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रवीण श्रीवास्तव, एई एडीए।