नगर की जीवन रेखा कही जाने वाली तमसा आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। नदी के किनारे तक धड़ाधड़ अवैध मकानों का निर्माण धड़ल्ले से जारी है लेकिन प्रशासन स्तर पर कोई खास कार्रवाई नहीं की गई है। अवैध निर्माण की सूचना मिलने पर प्राधिकरण की सचिव कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी करता है लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति पहले जैसी हो जाती है।
धार्मिक महत्व की पौराणिक नदी तमसा आज अतिक्रमण और गंदगी के चलते कराह रही है। नदी में बहने वाले नाले जहां इसके पानी को विषैला कर रहे हैं, वहीं किनारे बेधड़क बन रहे मकान इसके प्रवाह को भी रोकने का काम कर रहे हैं। हालांकि यह नदी बरसात के मौसम में अपने विकराल रूप में होती है लेकिन किनारे बने मकानों के कारण इसका प्रवाह बदलत जाता है।
नदी के किनारे के वनीकरण क्षेत्र में रोकने का कार्य आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का है लेकिन अपने गठन के बाद से विकास प्राधिकरण ने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसका परिणाम है कि नदी पर बने पुुराने पुल के आसपास दर्जनों आवासीय और व्यावसायिक भवन बनकर तैयार हो चुके हैं।
कई होटलों का निर्माण होता रहा और प्राधिकरण सोता रहा। जब आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की सचिव ऋतु सुहास को बनाया गया तो उन्होंने वनीकरण क्षेत्र में बने मकानों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया। इससे वनीकरण क्षेत्र में मकान बनाने वालों में हड़कंप मच गया। प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2009 से अब तक कुल 45 लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। जबकि इस क्षेत्र में सैकड़ों आवासीय भवन बन चुके हैं। नोटिस जारी होने के बाद भी विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध भवन का निर्माण जारी है।