राष्ट्रीय विचार मंच द्वारा विस्थापित कश्मीर विषय पर एक दिवसीय वैचारिक सम्मेलन का आयोजन शुक्रवार को रोडवेज क्षेत्र स्थित एक बैंक्वेट हाल में किया गया। जिसका शुभारंभ वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, प्रोफेसर राजाराम यादव और अरूण कुमार ने दीप प्रज्जवलन कर किया। सम्मेलन में लोगों कश्मीर की समस्या पर प्रमुखता से अपने विचार व्यक्त किए।
वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कश्मीर की समस्या सिर्फ कश्मीर की नहीं बल्कि यह पूरे हिंदुस्तान की समस्या है। भारत को टैक्स देने वालों का हिस्सा कश्मीर को मिलता है। असम से लेकर कन्या कुमारी तक जवान अपनी जान देकर कश्मीर की हिफाजत करता है।
इसलिए कश्मीर असम से लेकर कन्याकुमारी तक के लोगों का है। कश्मीर की समस्या समाधान के लिए पाकिस्तानी आतंकवादियों से पहले इस देश में मौजूद बुद्धजीवी आतंकवादियों से लड़ना होगा तभी हम कश्मीर को बचा पाएंगे। पूृर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव ने कहा कि जिस तरह ब्रह्मांड एक है उसी तरह कश्मीर भी भारत में समंवित है।
भारत में रहने वाले लोग कश्मीरियों को महसूस कराएं कि कश्मीर में रहने वाले लोग भी हमारे हैं और उनकी समस्या भी हमारी समस्या ही है। कश्मीर स्टडी के संयोजक अरूण कुमार ने कहा कि कश्मीर की समस्या पूरे जम्मू कश्मीर की समस्या नहीं है। यह कश्मीर के मात्र पांच जिलों के अंदर है।
इसे बड़ा करने में पाकिस्तान से ज्यादा दिल्ली में 70 वर्षों से बैठे लोगों ने खड़ा किया है। सम्मेलन में कश्मीर की खूबसूरती पर प्रदर्शिनी लगाई गई थी जिसका वहां पहुंचे लोगों ने लुत्फ उठाया। राष्ट्रीय विचार मंच के संयोजक सिद्धार्थ सिंह ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और संचालन कौशलेंद्र विक्रम मिश्र ने किया।
इस मौके पर दुर्गा प्रसाद अस्थाना, ब्रजेश यादव, घनश्याम सिंह, कमलेंद्र मिश्र मोनू, निखिल राय, शिवनाथ आदि लोग उपस्थित थे।
विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए निकाला शांति मार्च
अहरौला। पांच लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को विस्थापित करने की मांग को लेकर ब्राह्मण सभा के प्रशांत उपाध्याय के नेतृत्व में शुक्रवार को उदैना महाविद्यालय से शांति मार्च निकाला गया। जो भोगईचा, चांदनी चौक, मतलूबपुर होते हुए अहरौला ब्लाक पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
जहां ब्राह्मण सभा के प्रशांत उपाध्याय के नेतृत्व में बीडीओ अहरौला के कार्यालय में भारत के प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। जिसमें खानाबददोश का जीवन बिता रहे कश्मीरी पंडितों की विस्थापन नीति बना कर उन्हें विस्थापित करने की माँग की। इस मौके पर आलोक, सुमीत, विवेक, हर्ष, राजन, सनी आदि उपस्थित थे।