लोगों ने पिंडदान कर ब्राह्मणों को भोजन कराया और दान आदि दिया। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नदी के साथ तालाब के तट पर पिंडदान और श्राद्ध के साथ कर्मकांड किया गया। नगर क्षेत्र के गौरीशंकर घाट, राजघाट, भोला घाट, सिधारी घाट पर श्राद्ध का कार्य किया गया। लोगाें ने अपने पूर्वजों को पिंडदान कर अन्य कर्मकांडोें को पूरा किया।
ऐसे में नदी के साथ पोखरे और तालाब के किनारे कार्मकांड करने वालों का हुजूम उमड़ा रहा। लोगों ने विधि-विधान से पितरों की पूजा और अर्चना की। अंत में पूर्वजों को पिंडदान कर ब्राह्मणों को यथा संभव दान आदि भी दिया। मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में लोगों ने कर्मकांड करने से पूर्व अपने बाल मुंडवाए तथा दाढ़ी बनवायी। तािकि विधि विधान से कर्मकांड संपन्न कराया जा सके। इसके चलते नाई भी व्यस्त रहें।