भूमंडलीकरण के इस दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में नए तरीके की चुनौतियां सामने आई हैं। क्षेत्रीय पत्रकारों को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होने की जरूरत है। उक्त बातें चौधरी चरण सिंह पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार डा. सुरेंद्र सिंह ने मंगलवार को तमसा प्रेस क्लब में आयोजित 'पत्रकारिता और उसकी वर्तमान चुनौतियां' विषयक संगोष्ठी में कही।
उन्होंने कहा कि तकनीक ने पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत बदलाव किए हैं। पेनलेस पत्रकारिता के दौर में आधुनिक तकनीकों से पत्रकारों को लैस होने की जरूरत है। तभी वह आधुनिक चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। अध्यक्षता करते हुए विधायक आलम बदी ने कहा कि जिस तरीके से समाज बंटा है उसी तरीके से आज पत्रकारिता भी बंट गई है।
समाजवादी चिंतक विजय बहादुर राय ने कहा कि समाचार पत्रों से जो जुड़ाव आमजन का रहा है। उसे बरकरार रखना पत्रकारिता से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी चुनौती है। वामपंथी विचारक जय प्रकाश नारायण ने स्वतंत्रता पूर्व से लेकर वर्तमान दौर की पत्रकारिता पर अपनी बात रखीं।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर के पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक डा. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि आज पत्रकारों को बहुत से दबावों के बीच काम करना पड़ रहा है। ऐसे में खबरों के संकलन से लेकर प्रेषण तक में विश्वसनीयता को बरकरार रखने की जरूरत है। संगोष्ठी में अशोक वर्मा, ज्ञान प्रकाश दुबे, अभिषेक जायसवाल, वीरभद्र सिंह, शिवानंद सिंह, मैकस आजमी आदि ने अपनी बात रखी।
संगोष्ठी के पहले वरिष्ठ पत्रकार डा. सुरेंद्र प्रसाद सिंह को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रभु नारायण प्रेमी, एसके सत्येन, इफ्तेखार खान, अजय सिंह, राम सिंह यादव, अश्वनी यादव, असलम जामाली, नंदलाल यादव, श्याम बिहारी श्रीवास्तव, मनोज जायसवाल आदि उपस्थित रहे।