रामजीत 20 मई 2024 को सजा पूरी कर जेल से रिहा हो चुका था। उसने जेल में रहते हुए अपने साथी बंदी शिवशंकर यादव उर्फ गोरख निवासी ग्राम चकमेउवां, थाना रानी की सराय के साथ इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने की योजना बनाई। शिवशंकर जेल में लेखा कार्यालय में राइटर के रूप में कार्यरत था।
दोनों ने मिलकर जेल के कर्मचारी मुशीर अहमद और अवधेश कुमार पांडेय, दोनों की मिलीभगत से जेल अधीक्षक की चेकबुक चुराई और फर्जी हस्ताक्षर व मोहर तैयार कर करोड़ों रुपये निकालने की साजिश रची। कोतवाली पुलिस की टीम ने शनिवार देर रात उप निरीक्षक दल प्रताप सिंह के नेतृत्व में चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान सभी ने अपना अपराध स्वीकार किया।
पुलिस अधीक्षक नगर मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी रामजीत यादव के पास से गबन की रकम से खरीदी गई एक बुलेट मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन, बैंक चेक की फोटो, बैंक स्टेटमेंट और जेल की फर्जी मुहर बरामद की गई है।
पूछताछ में रामजीत ने बताया कि उसने बहन की शादी में 25 लाख खर्च किए, 3.75 लाख रुपये की बुलेट खरीदी और 10 लाख रुपये कर्ज चुकाने में लगाए। उसके खाते में बची 23 हजार रुपये की राशि को पुलिस ने होल्ड कर दिया है। वहीं अन्य अभियुक्तों में मुशीर अहमद ने 7 लाख, शिवशंकर यादव ने 5 लाख और अवधेश पांडेय ने 1.5 लाख रुपये व्यक्तिगत व घरेलू खर्चों में खर्च कर दिए।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है, जिससे अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका भी उजागर की जा सके।