चौड़ी सड़कों और अन्य कार्यों से जिले और मंडल मुख्यालय का स्वरूप भले ही बदला हो लेकिन कई स्थानों पर पगडंडियों से भी बदतर हालत में पहुंचा आजमगढ़-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग 233 विकास में बाधक सिद्ध हो रहा है। मुहम्मदपुर, रानी की सराय से कोटिला तक और लालगंज समेत अन्य कुछ स्थानों पर हाईवे पर चार-फांच फीट के क्षेत्रफल में एक से ढाई फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। कहीं-कहीं तो गड्ढों की गहराई तीन फीट से भी अधिक है। इन स्थानों पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। बस, ट्रक और छोटे चार पहिया वाहन एक तरफ झुक जाते हैं जिससे उनके पलटने की आशंका बनी रहती है।
सड़क खराब होने के कारण आजमगढ़ से वाराणसी तक 90 किलोमीटर की दूरी तय करने में चार से पांच घंटे लग जाते हैं। रास्ते में गड्ढों के चलते एक्सएल टूटने से यदि कोई बस या ट्रक फंस गया तो लंबा जाम लग जाता है और यात्रा की मियाद छह घंटे भी होती है। इससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। वाराणसी से आजमगढ़ आने जाने के बाद बेहत थक चुके यात्री और कोई काम करने के लायक नहीं रहते हैं। अफसोस की बात तो यह है कि जिले के दो सांसदों में आमजगढ़ (सदर) के सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और लालगंज की सांसद नीलम सोनकर भी इस गंभीर समस्या से बेखबर हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी भी गंभीर नहीं हैं।
आजमगढ़-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन होने वाला है। इसके लिए सड़क के किनारे अधिग्रहित जमीन पर मिट्टी डाली जा रही है। इस मार्ग के फोरलेन बनाने में वर्षों लग जाएंगे। वाराणसी से आजमगढ़ आने जाने वाले लोगों का मानना है कि फोरलेन का कार्य शुरू होने के कारण ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़क की मरम्मत नहीं कराना चाहता है। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग अधारिटी का कहना है कि हाईवे पर जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे बरसात का पानी भरने से सड़क खराब हो रही है। अगर सड़क पर बने गड्ढों में गिट्टी भरकर पैचिंग भी कर दिया जाए तो काफी हद तक राहत मिल सकती है लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा रहा है।
इतना जरूर है कि बाजार के पास जहां सड़क पर गड्ढे बने हैं उसमें कुछ लोगों ने ईंट के टुकड़े डाल रखे हैं जो नाकाफी है। राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत यह है कि आजमग़ढ़ जिला मुख्यालय से मोहम्मदपुर बाजार तक 20 किलोमीटर की दूरी में सबसे गंभीर स्थिति बेलइसा ओवरब्रिज, रानी की सराय, कोटिला, मुहम्मदपुर, लहबरिया, शंकरपुर चेकपोस्ट, सईदवारा में हैं। इन स्थानों पर दो सेतीन फीट तक के गड्ढे बने हैं। कोटिला के पास तो देखने से सड़क का स्वरूप गांव की पगडंडी से भी बदतर है। इसके अलावा लालगंज में भी गड्ढे बने हैं। वाराणसी से लालगंज आने में दो घंटे से अधिक समय लग जाता है।
इसके बाद सड़क खराब होने के कारण लालगंज से आजमगढ़ तक कुल 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई से तीन तो कभी चार घंटे लग जाते हैं। इससे बसेें और अन्य वाहन खराब होते हैं। रोडवेज की बसों का मेंटिनेंस खर्च बढ़ गया है और आमदनी पर प्रभाव पड़ रहा। वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग को आगे बढ़ाते हुए नेपाल के लुंबनी तक बनाने की घोषणा करते हुए इसे नेशनल हाईवे नंबर 233 का नाम दे दिया। जमीन आदि का सर्वे होने के बाद निर्माण का जिम्मा नेशनल हाइवे एर्थारिटी को सौंप दिया गया।
अप्रैल माह से कार्यदायी संस्था ने धीरे-धीरे निर्माण कार्य शुरू करते हुए सड़क के बगल में दूसरी लेन बनाने के लिए मिट्टी पाटकर समतल करने का काम चल रहा था। बरसात कामौसम आने पर काम बंद कर दिया गया। मुख्य सड़क को नेशनल हाईवे बनाने की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार या उसके अधिकारी भी इस तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। मरम्मत के अभाव में पुरानी सड़क बीच-बीच में टूट गई। बारिश का पानी जमा होने से वह गड्ढों का दायरा बढ़ता जा रहा है।
वाराणसी से माल आने में हो रही देरी : आजमगढ़ शहर सहित आसपास के दूकानदारों की दूकानदारी वाराणसी मंडी पर निर्भर है। यहां के बड़े कारोबारी वाराणसी मंडी से माल बुक कराकर वहां से लाते हैं। लेकिन सड़क खराब होने की वजह से इन दूकानदारों का सामान निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पा रहा। उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा।
रोडवेज की आमदनी हो रही प्रभावित : क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार की मानें तो वाराणसी, जौनपुर की ओर जाने और आने वाली बसें अक्सर जाम में फंसकर लेट हो रही। जाम की वजह से जहां अधिक डिजल खर्च हो रहा। वहीं जलयुक्त गड्ढे में गिट्टी और पत्थरों के खरोंच से टायर पंचर हो रहे। बसें के देर बिलंब से गंतव्य तक पहुंचने की वजह से विभाग के प्रतिदिन हजारों रुपये का चुना लग रहा।
यात्री और स्थानीय लोग झेल रहे जहमत : क्षतिग्रस्त सड़क पर रेंगते वाहनों में सफर करने वाले यात्रियों का न केवल समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि लोग हड्डी के दर्द से परेएशान हैं। गड्ढों की वजह से बाजार में जाम लगने की वजह से न केवल स्थानीय लोग परेशान हैं, बल्कि मुहम्मदपुर, लहबरिया, कोटिला, बेलईसा आदि बाजारों के दूकानदारों की दूकानदारी भी प्रभावित हो रही है।
नेशनल हाईवे निर्माण और जर्जर सड़क की मरम्मत के लिए निर्माणदायी संस्था को पत्र लिखा गया है। इसी संबंध में 17 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग भी होने वाली थी लेकिन किन्ही कारण से वह स्थगित हो गई। सड़क की मरम्मत करवाने के लिए पुन: कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा जाएगा। - सुहास एलवाई, जिलाधिकारी, आजमगढ़
जिन-जिन स्थान पर सड़क ज्यादा खराब है, वहां रोज मरम्मत का कार्य किया जा रहा लेकिन गड्ढों में जमा पानी के निकासी का कोई स्थान और व्यवस्था न होने की वजह से हमारा प्रयास व्यर्थ है। जब तक सड़क पर जमा होने वाले पानी के निकासी की व्यवस्था नहीं होगी। सड़क पूरी तरह से दुरुस्त नहीं किया जा सकता। - श्रेगर राव, एरिया मैनेजर, राष्ट्रीय राजमार्ग अथारिटी