फिल्म सोसाइटी एवं जन संस्कृति मंच के तत्वावधान में नेहरू हाल में चल रहे फिल्मोत्सव के दूसरे दिन की फिल्मों में बच्चों की मासूमियत और दस्तावेजी फिल्मों में आम जन की पीड़ा साथ-साथ झलकी। दूसरे दिन का पहला सत्र बच्चों के नाम रहा। बाल दिवस पर बच्चों की कई फिल्में दिखाई गईं। फिल्म छुटकन की महाभारत ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इस सत्र में कहानी लेखन कार्यशाला भी हुई। जिसमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सठियाव के छात्रों ने भाग लिया।
इस फिल्म में महाभारत के कथानक को रोचक ठंड से प्रस्तुत किया है। दूसरे सत्र में दस्तावेजी फिल्म ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ दिखाई गई। जिसमें 2014 में घटित दंगे के कारणों की पड़ताल की गई है। फिल्म के निर्देशक नकुल सिंह साहनी ने ऐसी कई दस्तावेजी फिल्में बनाई हैं। सायं तीन बजे से निर्देशक अतुल सेठ की डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘स्मार्ट सिटी हमारे शहर और दलित कामगार’, दिखाई गई।
इस फिल्म में सफाई कामगारों की सामाजिक, आर्थिक दशा को नई दृष्टि से दिखाया गया है। इसके बाद शंकर गुहा नियोगी की फिल्म ‘जन स्वास्थ्य हमारी सरकार और नई पहल’, दिखाई गई जिसमें अस्पताल की कहानी को दिखाया गया है। विक्रमजीत गुप्ता की बांग्ला फिल्म अचल दिखाई गई।
अंत में देर शाम सात बजे सांस्कृतिक प्रोग्राम का आयोजन किया। जिसमें स्नेहलता श्रीवास्तव ने वायलिन वादन और डा. निशा सिंह यादव ने सितार वादन प्रस्तुत किया। लोगों ने कार्यक्रम की सराहना की। आयोजन में विजय बहादुर राय, विजय यादव, डा. बद्रीनाथ, डा. प्रेम प्रकाश यादव, इंद्रसेन सिंह, डा. दुर्गा सिंह, जय प्रकाश राय, हेमंत कुमार, जमुनाव प्रजापति, डा. उदयभान यादव, डा. विनय सिंह यादव आदि उपस्थित रहे।