मेजवां। मुस्लिमों का सबसे पाकीजा और महत्वपूर्ण माह-ए-रमजान शुरू हो गया है। गुरुवार को रोजेदारों ने दूसरे रोजे का इफ्तार किया। मस्जिदों में तराहबीह पढ़ी गई। कोविड-19 की गाइडलाइन और नाइट कर्फ्यू की पाबंदी के चलते मस्जिदों या अन्य स्थानों पर परंपरागत होने वाली तरावीह की सामूहिक नमाज अदा नहीं की जा सकी।
कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक, मस्जिदों में एक समय पर मात्र पांच लोगों ने ही यह नमाज अदा कर रहे हैं। पूरे माह रोजा और नमाज की अतिरिक्त इबादत के अलावा मुस्लिम तिलावत और अन्य इबादतें भी ज्यादा से ज्यादा कर रहे है। इसमें हाफिज ने इमामत करते हुए लोगों को कुरान सुनाया। बीते साल की तरह इस बार भी कोरोना के चलते मस्जिदों में तरावीह और सामूहिक इफ्तार नहीं हो पा रहे हैं। रोजेदारों में इसे लेकर अफसोस और मलाल है। रोजेदार लगभग 14 घंटा 10 मिनट पूरी तरह भूखे प्यासे रहकर रोजे का फर्ज अदा कर रहे हैं।
- मौलाना फ़रहत हुसैन ने बताया कि रमजान के महीने में ही कुरान शरीफ नाजिल हुआ है। इस पाक महीने में एक नेकी का 70 गुना सवाब मिलता है। इस महीने अल्लाह अपने बंदों के मगफिरत के लिए नेकी के सारे दरवाजे खोल देता है। फूलपुर के पुरानी जामा मस्जिद में रोजेदारों की सहूलियत के लिए जनरेटर लगे है। यहां कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए तराबीह पढ़ी जा रही है।
- मौलाना वसी मोहम्मद खान ने कहा कि माहे रमजान इस्लामी साल का वह पवित्र महीना है, जिसमें इंसानों की हिदायत और रहनुमाई के लिए अल्लाह पाक ने अपने मुकद्दस कुरान पाक को नाजिल (अवतरित) किया है। इस महीने में एक ऐसी रात भी है, जिसमें की गई इबादत हजार महीने की इबादत के बराबर है। इस महीने में अधिक से अधिक पुण्य का काम करना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों से अपील की है कि वह इबादत के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन अवश्य करें।