फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Azamgarh News: एक पंचायत पर कब्जा तो दूसरे की हो गई रजिस्ट्री

विज्ञापन
विज्ञापन
अहरौला। इसे लापरवाही कहें या राजस्व विभाग की मनमानी... जो भी हो लेकिन, पखनपुर गांव में 1990 के दशक में बने पंचायत भवन की जमीन रजिस्ट्री हो चुकी है और रजिस्ट्री लेने वाला व्यक्ति का पंचायत भवन पर कब्जा भी है। वहीं मतलूबपुर में बने पंचायत भवन पर होमगार्ड और पीआरडी के जवानों का कब्जा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मतलूबपुर में पंचायत भवन पर कब्जे की जानकारी तो जिम्मेदारों को है लेकिन पखनपुर के पंचायत भवन की हुई रजिस्ट्री की जानकारी नहीं है।
विज्ञापन


अहरौला विकास खंड के पखनपुर गांव में 1990 के दशक में जब गांव के काशी सिंह प्रधान थे तो उन्होंने पंचायत भवन का निर्माण कराया था। जिस जमीन पर पंचायत भवन का निर्माण कराया वह जमीन गांव के इंद्रेश सिंह पुत्र देवतादीन के नाम पर थी। पंचायत भवन बनने के बाद इंद्रेश सिंह ने यह जमीन गांव के धर्मराज प्रजापति जो सेक्रेटरी के पद से सेवा निवृत्त हुए थे को रजिस्ट्री कर दी।
इनके मरने के बाद यह जमीन धर्मराज के तीन पुत्रों रामपलट, रामदरश, रामलवट पुत्रगण धर्मराज प्रजापति के नाम हस्तांतरित हो गई। उक्त पंचायत भवन पर प्रजापति भाइयों का कब्जा है। राम पलट के पुत्र पंकज प्रजापति ने बताया कि पहले यहां बनरहिया गांव का पोलिंग बूथ हुआ करता था।
विज्ञापन

2000 में आजमगढ़ से टीम जांच में आई थी और जानकारी लेने के बाद यहां के बूथ को बनरहिया गांव के स्कूल पर कर दिया गया। पंकज ने बताया कि हम लोग खुद कई बार जनसुनवाई के माध्यम से ब्लाॅक में प्रार्थना पत्र देकर सरकारी भवन हटाने का निवेदन कर चुके हैं। लेकिन, अब तक इसे हटाया नहीं गया। वर्तमान प्रधान के द्वारा एसडीएम फूलपुर को इसके संबंध में शिकायत की गई थी एसडीएम आए और जांच कर चले गए। सरकारी भवन निजी भूमि पर कैसे बना पता नहीं और कैसे रजिस्ट्री हुई।

वहीं विकास खंड के ही मतलूबपुर गांव में भी पंचायत भवन बनाया गया है। इस पंचायत भवन पर होमगार्ड और पीआरडी जवानों का कब्जा है। जो यहां अपना आफिस बनाए हुए हैं।
मतलूबपुर पंचायत भवन पर होमगार्ड और पीआरडी जवानों के रहने का मामला तो हमारे संज्ञान में आया है। लेकिन, पखनपुर में पंचायत भवन की जमीन रजिस्ट्री करने का मामला संज्ञान में नहीं में नहीं है। दिखवाते हैं क्या मामला है और कैसे हुआ। - आलोक कुमार, खंड विकास अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें