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Azamgarh News: देश और बेटा रहे सुरक्षित भगवान से करती हूं प्रार्थना

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आजमगढ़। सरहद पर पाकिस्तानी सेना से भारत के जांबाज सैनिक मोर्चा संभाले हुए हैं। वह पाकिस्तान की हर हिमाकत का मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं। भारतीय सैनिकों के इस अदम्य साहस की जय-जयकार हो रही है, मगर इन वीर सैनिकों की मांओं का कलेजा बैठा जा रहा है। दरवाजे पर होने वाली हर दस्तक पर उनका दिल धड़क उठता है। अनहोनी की आशंका के बीच वह अपने लाल की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती रहती हैं। लेकिन उनका कहना है कि यदि बेटा देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देगा तो यह एक मां के लिए गर्व की बात होगी।
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देश और बेटे के लिए करती हैं प्रार्थना



अहरौला: फूलपुर तहसील के रामपुर कुकुरीपुर निवासिनी सरस्वती देवी के दो बेटे आर्मी में थे। उनके बड़े बेटे गोविंद माधव मिश्रा सेवा निवृत्त हो चुके हैं। वहीं छोटे बेटे शिव माधव मिश्रा सीओ के पद पर देहरादून में पोस्टेड हैं। इनकी 1997 में तैनाती हुई थे। हमारे परिवार में हमारे दोनों बेटों के अलावा कोई नहीं सेना में गया। जब बेटा घर पर आता है तो उसके द्वारा तैनाती के दौरान उस पर क्या गुजरती है उसके बारे में बताया जाता है। उसके द्वारा हमें ढांढ़स बंधाया जाता है कि अम्मा डरो नहीं। अभी जल्द ही हमारे घर में शादी पड़ी है इस समय जो स्थिति है इसके कारण वह नहीं आ सकते। इसी तरह से एक बार हमारी तबीयत खराब हुई थी तब भी नहीं आ पाए थे। सरस्वती देवी ने बताया कि जब पाकिस्तान से युद्ध की आशंका हुई तो उससे बात करने की कोशिश की। लेकिन, फोन पर बात करने में परेशानी है इसलिए परिवार के लोगों से हालचाल पूछती हूं। पोते और बहू उसका हाल चाल बताते हैं। युद्ध की बात सुनकर परेशान हूं लेकिन गर्व है कि मेरा बेटा देश की सेवा कर रहा है। पूजा में हर रोज बेटे और देश दोनों के लिए भगवान से प्रार्थना करती हूं कि दोनों सुरक्षित रहें।



एक परिवार के तीन बेटे कर रहे देश सेवा, मां को गर्व



फरिहा। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के मैनपार गांव में एक ही परिवार के तीन बेटे चंद्रशेखर, धर्मेंद्र और करनल सीमा पर देश की सेवा में लगे हैं। इनमें से धर्मेंद्र की तैनाती 2014 में हुई थी। वह जब भी घर आता था अपनी यूनिट के बारे में ही बात करता था। इस दौरान वहां की अगर कोई घटना आदि का जिक्र करता था। कभी भी जरूरत पड़ी तो वह छुट्टी लेकर आ गया। हमारा पूरा फौजियों का खानदान है। धर्मेंद्र के पिता और चाचा भी फौज में रहे हैं। हाल ही में इनमें से धर्मेंद्र छुट्टी पर घर आया हुआ था। धर्मेंद्र की मां मिर्जा देवी ने बताया कि हमारा बेटा धर्मेंद्र आया हुआ था उसकी तैनाती रांची में है। लेकिन, उसको फोन आया की बॉर्डर पर तुरंत पहुंचे। मेरा बेटा घर छोड़कर तुरंत देश सेवा के लिए निकल दिया। अब हमें उसके मैसेज और फोन का इंतजार रहता है। उनकी हाल-चाल लेने के लिए, फिर भी हमें गर्व है कि कम से कम हमारे बेटे देश सेवा के लिए लगे हुए हैं। हमें और किसी चीज का गम नहीं रहता है। हम ईश्वर पर विश्वास करती हैं। मौत रहेगी तो आदमी कहीं पर भी रहे मर सकता है। मरने जीने का क्रम लगा रहता है। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे बच्चों को कुछ भी नहीं होगा।
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बेटे पर गर्व, पर घर आने का इंतजार

बूढ़नपुर। तहसील क्षेत्र के लहरपार गांव निवासी सत्यनारायण सिंह पुत्र स्वर्गीय अंजनी सिंह इंडियन आर्मी में सूबेदार पोस्ट पर तैनात हैं। 1996 में वह आर्मी में भर्ती हुआ था। माता शारदा देवी ने बताया कि उनकी वर्तमान में पोस्टिंग राजस्थान के बॉर्डर पर गंगानगर में है। जब भी जरूरत पड़ी बेटा छुट्टी लेकर घर आया। एकाध बार ऐसा हुआ कि वह समय पर नहीं पहुंच सका। मेरा बेटा बहादुर सिपाही है। उसका बचपन से ही शौक इंडियन आर्मी में जाने का था। बेटा जब भी बात करता था यही कहता था कि मुझे देश सेवा करने का मौका मिले। क्योंकि ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते देश के लिए कुछ कर गुजरने का मौका मिला है तो मैं अपने फर्ज से पीछे नहीं हट सकता। उसके पिता भी एक जांबाज सिपाही रहे हैं फिर उनका बेटा अपने फर्ज से कैसे पीछे रह सकता है। मैं एक मां हूं मेरा ध्यान हमेशा बेटे के ऊपर लगा रहता है। जब भी वह छुट्टी पर घर आता है ड्यूटी दौरान की बातें बताता है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वह अपने मकसद में कामयाब होकर ससम्मान घर वापस आए। उसका हम लोग इंतजार कर रहे हैं।
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