37 साल पहले गैंगस्टर की कार्रवाई, हिस्ट्रीशीट भी खोली गई थी
डीआईजी ने मामले की जांच कराई। इससे पता चला कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के चकवारा निवासी नकदू के खिलाफ 1984 में हत्या और साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। नकदू ने पुरानी दुश्मनी में जहानागंज के रहने वाले मुन्ना यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 1987 में नकदू पर डकैती का दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ। उसके खिलाफ 1988 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। हिस्ट्रीशीट भी खोली गई थी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि नकदू यादव ने कक्षा चार तक की पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल की है। इसके बावजूद आठवीं कक्षा पास होने का फर्जी अंक पत्र बनवा कर 1989 में होमगार्ड की नौकरी हासिल कर ली। इससे पहले तक उसकी पहचान नकदू यादव पुत्र लोकई यादव के रूप में होती थी, लेकिन नौकरी मिलने के बाद पहचान बदल गई। नाम बदल कर नौकरी करने लगा।
पुलिस को भी दिया चकमा
गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीट ने नाम, पहचान बदल कर नौकरी हासिल कर ली, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। रानी की सराय थाने की पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस ने नौकरी से संबंधित दस्तावेजों को सत्यापन भी कर दिया। चरित्र प्रमाण पत्र पर 1992 में हस्ताक्षर किए गए।
बोले अधिकारी
फर्जीवाड़ा कर होमगार्ड की नौकरी करने का मामला सामने आया था। जांच में पुष्टि हुई। नकदू के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उसने कूटरचित दस्तावेज तैयार किया और अपना बदल लिया। पिछले 35 साल से रानी की सराय और मेंहनगर थाने में नौकरी कर रहा था। आरोपी पुलिस को चकमा देकर नौकरी कर रहा था। इसकी विभागीय जांच भी कराई जा रही है। - हेमराज मीणा, एसपी आजमगढ़।