आजमगढ़। खेतों की सेहत को सुधार कर उपजाऊ बनाने के लिए इस बार 44 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच होगी। चयनित गांवों से 100-100 नमूने लिए जाएंगे। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा ताकि वह उसके हिसाब से अपने खेतों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग कर सकें।
खेतों में जैविक, हरी खाद का प्रयोग न होने और फसल चक्र न अपनाए जाने से दिन प्रतिदिन मिट्टी की सेहत खराब होती जा रही है। एक ही फसल बार-बार उगाए जाने से मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्व खत्म होते जा रहे हैं। लोग अधिक पैदावार के लिए रासायनिक उर्वरकों का बड़े पैमाने पर प्रयोग कर रहें हैं।
यह फसल और मिट्टी दोनों के लिए ठीक नहीं हैं। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने और मिट्टी की सेहत की जांच के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में सभी ब्लॉकों से 44 हजार नमूने लेकर जांच कराई जाएगी। जिले में 22 ब्लॉक हैं, प्रत्येक ब्लॉकों से 20-20 गांवों का चयन किया गया है। क्षेत्रीय नामित कर्मचारियों के माध्यम से किसान के खेत से मिट्टी का नमूना एकत्र किया जाएगा। इसके बाद इसे जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।
जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें संबंधित किसानों के खेतों में पोषक तत्वों की कमी का उल्लेख होगा। पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी दी जाएगी।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में सभी ब्लॉकों से 44 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य है। खेतों से नमूना लेने का कार्य शुरू हो चुका है। इसकी जांच कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वह अपने खेतों में पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सकें। -मुकेश कुमार, उप कृषि निदेशक