महिलाओं के लिए सख्त नियम लागू, फेसबुक न चलाएं और न पहने जींस
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बिलरियागंज कस्बा स्थित जामिअतुल फलाह मदरसे में तीन तलाक के मुद्दे पर पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। शनिवार को सेमिनार में मौलानाओं ने महिलाओं को उनका हक और अधिकार देने की बात कही।
सेमिनार में कर्नाटक से आए मौलाना अहमद सेराज उमरी ने कहा कि महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए और उन्हें जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनके बारे में सही जानकारी भी देनी होगी। यह तभी संभव है, जब हमें कुरान की सही जानकारी होगी। आमतौर पर हम अपने घरों पर भी महिलाओं को उनका हक नहीं दे पाते हैं जबकि तकरीर और भाषण खूब करते हैं।
अब सिर्फ तकरीर और भाषण से काम नहीं चलेगा। हमें इस्लाम के कानून का पालन हर हाल में करना होगा। अध्यक्षता करते हुए जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि शोध पत्र लिखने वालों को शोध पत्र लिखकर खामोश नहीं हो जाना चाहिए बल्कि उन्हें यह देखना चाहिए कि इसमें क्या कमी है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। इस्लाम के पैगाम को प्रस्तुत करने से पहले खुद को और घर-परिवार को इस्लामिक मॉडल बनाना होगा।
कार्यक्रम को नुसरत अली, मौलाना ताहिर मदनी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर नईमुद्दीन इस्लाही, अबू शहमा, राजिउल इस्लाम नदवी आदि लोग उपस्थित थे। मकबूल फलाही ने सभी का आभार प्रकट किया। संचालन मौलाना एजाज अहमद कासमी ने किया।