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समाज को नई दिशा देती हैं हरिऔध की रचनाएं

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निजामाबाद। साहित्यकार पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की पुण्यतिथि निजामाबाद बाईपास तिराहे पर स्थापित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर मनाई गई। इसके अलावा कस्बे में साहित्य प्रेमियों ने बारी-बारी से माल्यार्पण कर हिंदी के विकास में उनके योगदान को याद किया। कहा कि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की कविताओं में मानवीय गरिमा है। उनकी कविताएं समाज को नई दिशा देती हैं।
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नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेमा यादव ने कहा कि हरिऔध ने अपनी कविताओं से मानवीय करुणा, गरिमा, मानवीय स्वतंत्रता की आकांक्षा, मान्यताओं एवं दृष्टिकोण की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उनकी कविताएं समाज को नई दिशा देने के साथ समाज का मार्ग प्रशस्त करती हैं। समाज को जीवटता एवं बुद्धिमत्ता का पाठ पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में निजामाबाद कस्बा का नाम हरिऔध के कारण जाना जाता है। अधिशासी अधिकारी प्रह्लाद पांडेय ने बताया कि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का जन्म निजामाबाद कस्बे में 15 अप्रैल 1865 में हुआ था। उनके पिता का नाम भोला सिंह और माता का नाम रुक्मिणी था। निजामाबाद के जूनियर हाई स्कूल मिडिल से उन्होंने परीक्षा पास कर घर से ही संस्कृत, उर्दू, फारसी व अंग्रेजी आदि का अध्ययन किया। वह हिंदी के एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे दो बार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रह चुके हैं और सम्मेलन द्वारा विद्या वाचस्पति की उपाधि से सम्मानित किये जा चुके हैं। प्रिय प्रवास हरिऔध का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 1947 को अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की 73 साल की उम्र में मृत्यु हो गई। कार्यक्रम में पूर्व चेयरमैन अलाउद्दीन, संतोष गोंड़, गगन कश्यप, सुधीर पाठक, लालचंद, राहुल सोनकर, दीपक, लवकुश व जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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