हरिहरपुर में कजरी, लोकगीत, सूफी और भक्ति संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। हरिहरपुर संगीत घराना ट्रस्ट एवं हरिहरपुर घराना संगीत संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय हरिहरपुर कजरी महोत्सव के समापन पर कलाकारों ने प्रस्तुतियों से महफिल में रंग भर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता राय अनूप कुमार श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। हर्ष अमन, अजीत और ऋषभ ने गणेश वंदना ‘गौरी के ललना’ से कार्यक्रम की शुरुआत की। दीपक चौहान ने ‘अरे रामा कहवा से अइले बनवारी’ सुनाकर कजरी की छटा बिखेरी।
बाल कलाकार सत्यम मिश्रा ने ‘सजा जो घर को गुलशन सा’ से तालियां बटोरीं। विकास ने ‘झूला कदम की डरिया लगा मोहन’ और किशन मिश्र ने ‘पिया सावन में हमके झुलाइदा’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
सूफी संगीत की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं को भावविभोर किया। ‘छाप तिलक सब छीनी रे’ और ‘मैं तो हवा हूं, किस तरह पहरे लगाओगे’ जैसी प्रस्तुतियों के साथ विजय तिवारी, रजनीश पाठक और सुप्रिया ने कजरी व लोकगीतों की प्रस्तुति दी। अखिलेश गौड़, संजय सांडिल और विपिन पांडेय ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा।
मुख्य अतिथि राय अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हरिहरपुर संगीत घराना समृद्ध संगीत परंपरा का केंद्र है। युवा कलाकार इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार दिनेश श्रीवास्तव ने कजरी की लोक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
हरिहरपुर संगीत घराना के अध्यक्ष अजय मिश्र ने कहा कि कजरी केवल गीत नहीं, बल्कि लोक विरासत और सांस्कृतिक पहचान है। महोत्सव में कलाकारों और आयोजन में सहयोग देने वालों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
संचालन कमलेश मिश्र ने किया। इस दौरान राहुल मिश्र, आदर्श मिश्र, नीतीश मिश्र, विशाल मिश्र, संदीप मिश्र, विकास मिश्र, सपना बनर्जी समेत कलाकार और संगीतप्रेमी मौजूद रहे।