आजमगढ़। जिले की सड़कों पर निकलना मतलब जान हथेली पर रखकर घूमना कारण बिजली के तार हादसों को दावत दे रहे हैं। यहां हर पल सिर पर मौत मंडराती रहती है, लेकिन हुक्मरानों को शायद ऐसे हादसों का इंतजार है। जिले में बिजली के तार हादसों को दावत दे रहे हैं। हर महीने सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत दावों को खोखला साबित कर रही है। इसकी बानगी शहर के बड़ादेव, बदरका, कोलघाट, रैदोपुर, कोटमोहल्ला, मातवरगंज, तकिया व हरिबंशपुर समेत अन्य क्षेत्रों में देखने को मिलेगी। जहां बिजली के तार मौत बनकर लटक रहे हैं।
बिजली कंपनी हर साल बारिश से पहले बिजली लाइनों के रखरखाव का काम करती है। इसके तहत बिजली लाइनों के ऊपर आए पेड़ों की डालियों से काटने से लेकर जर्जरहाल तारों को बदलने, खुले व जमीन पर रखे ट्रांसफार्मरों को हटाने जैसे कई काम होते हैं, जिससे बारिश में बिजली सप्लाई बाधित न हो। मेंटेनेंस के इस काम पर करोड़ों रुपये खर्च होता है। हर रोज किसी न किसी क्षेत्र की बिजली कटौती हुई। लेकिन मेंटेनेंस की हालत यह है कि जिला मुख्यालय पर ही सड़क से सात से आठ फीट ऊंचाई पर बिजली के तार झूल रहे हैं। ट्रांसफार्मर जमीन पर रखे हैं, जिनसे हर बारिश में हादसे होते हैं, मवेशियों की जान जाती है। यह सब जिला मुख्यालय के हालात हैं, जो बिजली कंपनी के मेंटेनेंस की पोल खोल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी बदतर हैं। बिजली के तार आज भी कई दशक पुरानी और जर्जर हालत में हैं। तारों की हालत यह है कि, वह कभी भी टूट जाते हैं और इन टूटे तारों की मरम्मत के नाम पर बिजली कंपनी के कर्मचारी किसी पुराने तार से टूटी लाइन को जोड़ जाते हैं। बिजली तारों की यह मरहम पट्टी इतनी बार हुई है कि जगह-जगह बिजली लाइनों में जोड़ नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि 100 मीटर के तार में 15 से 20 जगह जाइंट नजर आ जाते हैं। यह जर्जर हाल तार हल्की सी हवा से बिजली का लोड बढ़ने के बाद कभी भी फाल्ट हो जाते हैं और कई बार दुखद हादसों का सबब बन चुके हैं। विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि जिले में जहां भी तार जर्जर हैं, वहां केबल तार लगाए जा रहे। वहीं जर्जर पोल भी बदले जा रहे है। अभी भी जर्जर तार बदलने का कार्य चल रहा है।