अतरौलिया। पौराणिक मेला में शनिवार को ही पूर्णिमा शुरू हो जाने से श्रद्धालुओं के आने व स्नान करने का सिलसिला शुरू हो गया था जो रविवार पूरे दिन चलता रहा। खुशगवार मौसम एवं रविवार के दिन पूर्णिमा स्नान पर्व पड़ने के कारण यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
पूर्वांचल के विभिन्न अंचलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने स्नानोपरांत महात्मा की समाधि पर मत्था टेक आशीर्वाद लिया और मेले का लुत्फ उठाया। मठ प्रशासन के मुताबिक पूर्णिमा पर दो से तीन लाख लोगों ने पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर भीगे वस्त्रों में ही समाधि पर मत्था टेक उन्हें प्रसाद स्वरुप कच्ची खिचड़ी एवं लाल गन्ना चढ़ाया। पूरा मठ परिसर जय गोविंद के गगनभेदी जयकारे से गुंजायमान रहा। हालांकि पूर्णिमा स्नान के दिन भी प्रशासनिक लापरवाही व बदइंतजामी के कारण पूरा मठ परिसर गंदगी की चपेट में रहा। स्नान के दौरान सरोवर के पास व्याप्त कीचड़ एवं फिसलन से कई श्रद्धालु गिरकर चोटिल भी हुए। गोविंद दशमी एवं पूर्णिमा स्नान पर्व पर अल्प सुरक्षा बल और प्रशासनिक बदइंतजामी के बावजूद आस्था ही भारी पड़ी।
चोर उचक्के रहे सक्रिय :
मेले में उमड़ी भारी भीड़ में चोर उचक्के पूरी तरह से सक्रिय नजर आए। इस दौरान अपर्याप्त पुलिस बल का फायदा उठाते हुए चोरों ने लगभग आधा दर्जन श्रद्धालुओं के पॉकेट और मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। बलिया के मिंटू, श्यामलाल तथा मऊ की शशिकला एवं उर्मिला देवी का मोबाइल एवं महिला की चेन व पर्स को चुरा लिया। मेला कोतवाली प्रभारी राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि तीन लोगों को गिरफ्तार कर मोबाइल बरामद किया गया है।
झूला न चलने से आक्रोश : ऐतिहासिक मेला गोविंद साहब में हफ्ते भर बाद भी बड़े झूले का संचालन न होने से झूला व्यवसायियों में जहां आक्रोश है वहीं झूला प्रेमी मायूस नजर आ रहे हैं। मेला समिति अध्यक्ष भौमेंद्र सिंह पप्पू ने बताया कि यदि बहुत जल्दी झूले के संचालन की अनुमति नहीं मिलती है तो सभी मनोरंजन व्यवसायी अनशन के लिए बाध्य होंगे। जिम्मेदारी मनोरंजन विभाग की होगी। मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम आलापुर सुभाष सिंह ने बताया कि मानक के विपरीत होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा झूला संचालन की अनुमति नहीं दी गई है।