आजमगढ़। जिले में पिछले एक साल में कोई भी गुड सेमेरिटन यानि नेक इंसान नहीं मिला है। गुड सेमेरिटन योजना प्रचार-प्रसार के अभाव में दम तोड़ रही है। इस योजना की जानकारी न होने के कारण लोग हादसे में घायल व्यक्ति को सड़क पर तड़पता देखकर भी बचकर निकल जाते हैं। जबकि अगर किसी घायल की जान बच जाती है तो उसे अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को पांच हजार रुपये का पुरस्कार मिलता है। सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2014 में गुड सेमेरिटन यानि नेक इंसान योजना को शुरू किया था। योजना के अंतर्गत तय हुआ कि ऐसा व्यक्ति जो सड़क पर तड़पते व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराएगा, उसे गुड सेमेरिटन यानि नेक इंसान के पुरस्कार से नवाजा जाएगा। योजना में पांच हजार रुपये (उत्तर प्रदेश में दो हजार) नकद इनाम और प्रमाण पत्र की व्यवस्था की गई थी। जिले में सालभर में दुर्घटनाएं भी हुई लेकिन कोई भी गुड सेमेरिटन यानि नेक इंसान सामने नहीं आया।
जिले में नहीं मिला किसी भी व्यक्ति को लाभ
आजमगढ़। जिले की करीब 60 लाख की आबादी है। इतनी बड़ी संख्या होने के बाद भी यहां एक भी व्यक्ति को योजना का लाभ नहीं मिला। इसकी एक बड़ी वजह योजना की जानकारी का अभाव है। परिवहन, स्वास्थ्य के अलावा प्रशासन के अधिकारियों की कमेटी इसकी निगरानी करती है लेकिन किसी के द्वारा प्रचार-प्रसार पर ध्यान नहीं दिया गया। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया कि आज तक इस योजना में किसी के द्वारा आवेदन नहीं किया गया।
ऐसे होता है नेक इंसान का चयन
आजमगढ़। घायल को अस्पताल पहुंचाने की सूचना पुलिस को दी जाएगी। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समिति नेक इंसान को पुरस्कृत करने के लिए चुनेगी। मूल्यांकन समिति चयनित नामों की सूची परिवहन आयुक्त को भेजेगी। परिवहन विभाग नेक इंसान के बैंक अकाउंट में पुरस्कार की राशि भेजेगा। इस कमेटी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी शामिल होते हैं।