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आजमगढ़ में घटने के बाद भी खतरा बिंदू से ऊपर बह रही घाघरा

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प्राथमिक विद्यालय सेमरी का दो शौचालय और एक कमरा घाघरा में विलीन, तेजी से हो रही कटान। - फोटो : AZAMGARH
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लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में घटोत्तरी का क्रम तेजी से जारी है। घटने के बाद भी नदी अभी तक दोनों ही खतरा बिंदू पर लाल निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर में घटाव के साथ ही नदी ने कटान तेज कर दी है। देवारावासियों की धड़कनें बढ़ गई है।
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मंगलवार की शाम बदरहुंआ नाले पर नदी का जलस्तर 72.15 मीटर दर्ज किया गया था। जो बुधवार की शाम 24 सेमी घटकर 71.91 मीटर पर आ गया। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से 23 सेमी अधिक है। वहीं डिघिया नाले पर मंगलवार की शाम को नदी का जलस्तर 71.24 मीटर दर्ज किया गया था। जो बुधवार की शाम 34 सेमी घ टकर 70.90 मीटर पर आ गया। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 50 सेमी ऊपर है। घाघरा नदी का जलस्तर भले ही तेजी से घट रहा हो लेकिन देवारावासियों की मुसीबत कम नहीं हुई है। नदी तेजी से कटान कर रही है। जिसके कारण कई पुरवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनके ऊपर कटान का खतरा मंड़राने लगा है। सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवाराचल में घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है। पर दुश्वारियां नहीं घट रही हैं। महाराजगंज विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सेमरी का दो शौचालय, दो कमरा घाघरा नदी में बह गया। स्कूल का अस्तित्व खतरे में है। साथ ही कृषि योग्य भूम िभी कट रही है। देवारा खास राजा, अचन नगर में कटान तेज हो गई है। बगहवा और झगरहवा पर संकट मंडरा रहा है।र आज भी नाव चलाई जा रही है। लोगों की समस्याएं अब भी बनी हुई है। पशुओं के चारा का, दवा का और आवागमन का संकट बना हुआ है। मानिकपुर गांव में 127 घर को अभी तक बाढ़ राहत पैकेट नहीं मिला। ग्राम प्रधान दुर्गा प्रसाद गुप्ता ने कहा कि मानिकपुर गांव कि दलित बस्ती, मल्लाह बस्ती, यादव बस्ती के 127 घर राहत से वंचित रह गए। जबकि यह बस्ती 20 दिन तक पानी में डूबी हुई थी।
समिति के धरने में उठा पुल के बहने का मुद्दा
लाटघाट। बाढ़ पीड़ित संघर्ष समिति द्वारा बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को लेकर दिया जा रहा अनिश्चित कालीन धरना बुधवारक को भी जारी रहा। धरने के दौरान बेलहिया पुल के बहने का मुद्दा भी उठा। नर्वदेश्वर मिश्रा, बांकेलाल आदि ने कहा कि पुल का निर्माण में ही दोष था नहीं तो 16 साल के अंदर ही पुल बह गया। यह कैसे हुआ। इंजीनियरों की गड़बड़ी से पुल कमजोर हुआ जिसका खामियाजा 15000 की जनता भुगतेगी।

बेलहिया ढाला पुल के पास नाव के इंतजार में ग्रामीण।- फोटो : AZAMGARH

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