रंग महोत्सव की बुधवार को हुई चौथी शाम शिक्षाविद विश्वंभर नाथ मिश्र को समर्पित रही। महोत्सव का शुभारंभ पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल, डा. वंदना द्विवेदी और डा. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन कर किया।
इसके बाद शुरू हुआ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर। जिसमें इंडियन रेडक्रास सोसायटी कटक उड़ीसा के मंदबुद्घि बच्चों ने उड़िया नृत्य की प्रस्तुति कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नटराज कला मंच पुणे महाराष्ट्र से आई रेवती जावलेकर ने आधुनिक नृत्य की प्रस्तुति दी तो गणेश आचार्या डांस एकेडमी मिर्जापुर की श्रीकृष्ण लीला समूह नृत्य की प्रस्तुति ने सबको भावविभोर कर दिया।
उड़ीसा से आए कलाकारों द्वारा संभलपुरी नृत्य और छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य की प्रस्तुति की। इसके बाद अंग नाट्य मंच बरियारपुर मुंगेर बिहार द्वारा नाटक 'आह्वान' का मंचन किया गया
दूसरी नाट्य प्रस्तुति में रंगाश्रम गोरखपुर द्वारा केसी सेन के निर्देशन में नाटक 'बगिया बाछा राम की' मनमोहक प्रस्तुति की गई। नाटक में कलाकारों ने एक व्यक्ति की अति महत्वाकांक्षा को कलाकारों ने मंच उकेरा।
तीसरा नाटक अपरमिता बलिया द्वारा भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की अमर कृति लोक नाट्य 'गबर घिचोर' का मंचन किया गया। नाटक में कलाकारों ने यह दर्शाया कि दर्द उसको होता है जिसका बेटा होता है।
उड़ीसा के कलाकारों द्वारा हरकोसाह के निर्देशन में नाटक 'चिड़िया का मनीसा' पेश किया गया। नाटक में मनुष्य की स्वार्थपरता को दिखाया गया।
पांचवी प्रस्तुति झारखंड के कलाकारों द्वारा अनिल सिहं के निर्देशन में नाटक 'आखिरी पन्ना' का मंचन कर नारी सशक्तिकरण को दर्शाया गया। रज्जन वर्मा, मनोज कुमार श्रीवास्तव,
अनीता सेठ, अनीता साइलेस, सपना बनर्जी, केके सेठ, नीलिमा श्रीवास्तव, ज्योति, सुधीर शर्मा, दिवाकर, आशीष आदि थे।