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पूड़ी सब्जी से हुआ बंदियों का स्वागत

Sun, 08 May 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
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नई जेल में शिफ्ट
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भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रविवार को मंडल कारागार में निरुद्ध बंदियों को इटौरा स्थित नई जेल में शिफ्ट कर दिया गया। सुबह करीब छह बजे से शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम करीब चार बजे तक चलती रही। तैयारियों के क्रम में जेल प्रशासन ने सुबह ही सभी बंदियों को चना और गुड़ खिला दिया था। नए जेल में जाने के बाद उन्हें पूड़ी सब्जी दी गई। नई जेल में जाने के लिए वाहन में बैठने से पहले और नए जेल में प्रवेश से पहले प्रत्येक बंदियों की सघन तलाशी ली गई।
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सिविल लाइन स्थित मंडल कारागार अंग्रेजों के जमाने में घुड़साल था। इस कारागार भवन की दीवारें और छतें काफी जर्जर हो चुकी हैं। मंडल मुख्यालय होने की वजह से यहां अन्य जेलों के बड़े अपराधियों को रखा जाता था। जेल की क्षमता 320 बंदियों के रखे जाने की थी लेकिन यहां 1090 बंदी निरुद्ध हैं। इसमें 54 महिलाएं शामिल हैं। क्षमता से अधिक बंदी होने की वजह से यहां की व्यवस्थाएं गड़बड़ हो गई थी। अपराध को भी बढ़ावा मिल रहा था।

ऐसे में वर्ष 2009-10 में शहर से पंद्रह किमी दूर इटौरा मोड़ के पास 42 एकड़ जमीन में 84 लाख रुपये की लागत जेल का निर्माण शुरू हुआ। निर्माण की जिम्मेदारी निर्माण निगम इकाई को सौंपा था। नया जेल मार्च 2014 में तैयार हो जानी थी लेकिन धनाभाव के चलते निर्माण रुक गया था। बाद में डिमांड करने पर सरकार ने 38 लाख रुपये और जारी किया। तब जाकर काम पूरा हुआ। निर्माण इकाई ने फरवरी 2016 में ही हैंडओवर कर दिया। 22 मार्च को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेल का लोकार्पण किया था। इसके बाद बंदियों के शिफ्ट करने की कागजी प्रक्रिया पूरी की गई और रविवार को पुराने मंडली कारागार के 1090 बंदियों को इटौरा स्थित नई जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
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किया गया था रूट डाटवर्ट
पुरानी जेल से बंदियों को नई जेल में शिफ्ट करते समय सुरक्षा की दष्टि से रुट डायवर्ट किया गया था। रास्ते में किए गए बदलाव की वजह से कोई भी वाहन रोडवेज की तरफ से शहर में सीधे प्रवेश नहीं कर पाया। वाहनों को रोडवेज के पीछे बंधे से भेजा जा रहा था। सुबह से शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम करीब चार बजे तक चली। इस दौरान जेल के आसपास कर्फ्यू जैसा माहौल रहा। वहीं, रास्ता बदले जाने से लोगों को परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ा। 

बंदियों की शिफ्टिंग के समय पुराने जेल की कमान एडीएम वित्त/राजस्व बृजेश कुमार, एसपी ट्रैफिक एच रहमान के जिम्मे थी। इनके मार्गदर्शन में पुलिस के जवान महिला और पुरुष बंदियों की सघन तलाशी लेकर पुलिस वैन में बैठा रहे थे। क्षमता के अनुरूप गाड़ी में बंदियों को लेकर संबंधित थानाध्यक्षों की निगरानी में नए जेल भवन में पहुंचाया गया। जहां एडीएम प्रशासन आशुतोष द्विवेदी, एसपी ग्रामीण शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में जवान प्रत्येक बंदियों की तलाशी लेने के बाद उन्हें अंदर बैैरक में प्रवेश करा रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से शहर कोतवाली, सिधारी, रानी की सराय, कप्तानगंज, जहानागंज, गंभीरपुर, फूलपुर आदि थानों की फोर्स लगाई गई थी। शेष थानों की पुलिस, सीओ रास्ते में भ्रमण करते हुए गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

नए कारागार की खासियत
करीब 45 एकड़ के भूखंड पर 1.22 करोड़ की लागत से तैयार हुई इस नई जेल में 1244 से अधिक बंदियों के रखे जाने की क्षमता है। इसमें महिला, पुरुष और किशोर बंदियों को अलग-अलग बैरकों में रखे जाने के लिए 45 से अधिक बैरक हैं। गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मोबाइल आदि के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए जेल में जैमर लगाया जाएगा। बंदियों को बढ़िया भोजन के लिए बड़ा सा मेस और मनोरंजन के लिए हाल बनाया गया है। पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए दो नलकूप लगे हैं। जेल के भीतर तनहाई के बंदियों के लिए अलग से बैरक बनी है।

बंदियों के नई जेल में शिफ्ट करने जेल प्रशासन की बड़ी मुश्किल हल हो गई। नई जेल में व्याप्त कुछ छोटी-मोटी खामियों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा। उम्मीद है कि अब व्यवस्थाएं सुचारु हो जाएंगी।  - यादवेंद्र शुक्ला, डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज

पुराने जेल भवन और जमीन आजमगढ़ विकास प्राधिकरण को हैंडओवर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी। उसमें जो निर्णय होगा, उसके तहत इस जमीन पर जनहित को देखते हुए कोई नया निर्माण करवाया जाएगा।  - सुहास एलवाई, जिलाधिकारी, आजमगढ़ 
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