चक्रपानपुर। बदलती जीवनशैली व भागदौड़ भरी जिंदगी युवाओं को भी यूरिक एसिड की चपेट में ले रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आने वाले हर 10 मरीज में से चार इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यूरिक एसिड बढ़ने के कारण मरीजों को जोड़ों का दर्द, शरीर पर सूजन जैसी समस्या आ रही है। तनाव भरी जिंदगी में मानसिक दबाव को कम करने के लिए लोग मांस, शराब व बियर का सेवन कर रहे हैं। इस कारण यूरिक एसिड बढ़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सक डाॅ. अमित पटेल ने बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से किडनी के कार्य करने की क्षमता घट रही है। किडनी यूरिक एसिड को बाहर नहीं निकाल पा रही है। इस कारण युवाओं के शरीर में जोड़ों के दर्द, सूजन व हाथ पैरों में जलन व झनझनाहट जैसी समस्या देखी जा रही है। बताया कि ओपीडी में
ओपीडी में दस में से चार लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं। यूरिक एसिड की जांच करने के लिए खून टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। खून टेस्ट के जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर में यूरिक एसिड का स्तर क्या है। अगर किसी मरीज के शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है तो ऐसी स्थिति में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों को शराब, बियर, मांस व मीठा भोजन व पेय पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। वहीं, ऐसे मरीजों को अपने भोजन में फल, हरी सब्जी, फाइबर युक्त भोजन व ग्रीन टी लेना चाहिए। यूरिक एसिड को घरेलू नुस्खों से भी नियंत्रित किया जा सकता है। नींबू का पानी, अजवाइन का पानी, अदरख, आंवला व सेब के सिरका से कुछ हद तक यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है।
यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण
जोड़ों में दर्द और सूजन। चलने, उठने-बैठने में परेशानी। त्वचा में लालिमा। हाथों और पैरों में जलन व झनझनाहट। थकान और बेचैनी महसूस होना आदि।
यूरिक एसिड बढ़ने का कारण
शराब, बियर, मांस का सेवन ज्यादा करना। किडनी का कमजोर होने तथा मोटापे के कारण यूरिक एसिड बढ़ जाता है। मीठा ज्यादा खाने से भी यह समस्या होती है।
ऐसे करें बचाव
खान-पान में बदलाव करें। पानी का ज्यादा सेवन करें। वजन कम करके भी यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है। योग करके, पैदल चलने, स्ट्रेचिंग कर भी यूरिक एसिड से बच सकते हैं।
यूरिक एसिड बढ़ने के कारण हाथ-पैरों में जलन व झनझनाहट होती है। दवा से यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है। जीवनशैली में बदलाव कर भी यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है।
- डॉ. अमित पटेल, राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर।